google-site-verification=6xpALziFXrUirL6iqg4wCEjQhb3wObOmA8r1Kpa8SqQ Shakir Archives - Investing setup.com ⚡iLet’s Grow TogetherStock market is not difficult, when you have sufficient knowledge. Investing and trading are fast earning per month easily. If you want to earn then learn first. Here I am sharing my 6 year Investing and trading experience with you & if you have any doubt then ask me…

YouTube custom thumbnail nahi lag raha hai.

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hi friends investingsetup  पर आपका स्वागत है YouTube & ब्लॉगिंग ,सोशल मीडिया औरऑनलाइन अर्निंग से रिलेटेड आर्टिकल मिल जाएगा | जो फाइनेंशली फ्रीडम अचीव कर सकते हैं इसलिए कोई भी आर्टिकल  ध्यान पूर्वक  से पढ़ें आज के डिजिटल युग में, किसी भी वेबसाइट, ब्लॉग, यूट्यूब चैनल या ऑनलाइन आर्टिकल की पहली झलक थंबनेल (Thumbnail) होती है।
थंबनेल एक छोटा प्रीव्यू इमेज होता है जो यूज़र को बताता है कि अंदर क्या कंटेंट है।
पर कई बार ऐसा होता है कि —

“थंबनेल नहीं दिख रहा है” या “थंबनेल गायब हो गया है” इस समस्या से लगभग हर ब्लॉगर, डेवलपर या कंटेंट क्रिएटर कभी न कभी गुजरता है।

thumbnail nahi lag raha hai

Uploads – इसकी मदद से आप कोई भी Image, Video और Audio को यहाँ पर upload करके उसका इस्तेमाल अपने youtube thumbnail में कर सकते है।

. Draw – इस फीचर की मदद से आप thumbnail में अलग-अलग तरह के पेन का इस्तेमाल करके कुछ भी Draw कर सकते है।

7. Projects – इसमें आपके द्वारा बनाए गए Project save हो जाते है जिनका आप जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल कर सकते है।

. Drawing Board / Canvas – यहाँ पर आपको जो सफेद रंग का area दिखाई दे रहा है इसे आप अपना ड्राइंग बोर्ड या फिर कैनवास कह सकते है। इसी पर आप अपनी पसंद के अनुसार thumbnail बना सकते है।

Step.5 Thumbnail Create करे

यहाँ पर हम ऑनलाइन पैसे कैसे कमाए (Make Money Online) के टॉपिक पर थंबनेल बनाने वाले है।

 

1. Design – सबसे पहले आपको Design के ऑप्शन पर जाना है।

2. Search Box – सर्च बॉक्स में आप अपने youtube video के टॉपिक के अनुसार कुछ भी सर्च कर सकते है, जैसा की हमने यहाँ पर make money online सर्च किया है।

3. इसके बाद आपको नीचे दिखाई दे रहे Thumbnail के Templates में से किसी एक free वाले template को चुन लेना है 

4. अब आपको चुना हुआ template ड्राइंग बोर्ड पर दिखाई देगा।

 

Step 6. Thumbnail को Edit करना 

अब आपको इस Thumbnail को Edit करना है तो इसके लिए अगर आप थंबनेल के बैकग्राउंड का रंग बदलना चाहते है तो निम्न स्टेप्स को फॉलो करे।

 

 

 

 

यह समस्या छोटी लगती है लेकिन अगर थंबनेल नहीं दिखे तो क्लिक रेट (CTR), व्यूज़ और वेबसाइट की प्रोफेशनल लुक पर बड़ा असर पड़ता है।

आइए इस आर्टिकल में विस्तार से समझते हैं कि थंबनेल क्यों नहीं दिखते, क्या कारण होते हैं, और इसे कैसे ठीक करें

 थंबनेल क्या होता है?

थंबनेल (Thumbnail) एक छोटी सी तस्वीर होती है जो किसी आर्टिकल, वीडियो या वेबपेज की झलक दिखाती है।
इसे “preview image” या “featured image” भी कहा जाता है।

उदाहरण के लिए:

     

    • अगर आप यूट्यूब पर जाते हैं, तो हर वीडियो के सामने एक तस्वीर होती है — वही उसका थंबनेल है।

    • अगर आप किसी वेबसाइट पर ब्लॉग पढ़ते हैं, तो हर पोस्ट के पहले जो इमेज दिखाई देती है — वही उसका Featured Thumbnail होता है।

थंबनेल का काम है ध्यान आकर्षित करना (Attract Attention) और यूज़र को क्लिक करने के लिए प्रेरित करना।

थंबनेल नहीं दिखने के आम कारण

जब आप कहते हैं “थंबनेल नहीं लग रहा है”, तो उसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।
आइए उन्हें एक-एक करके समझते हैं

1. Image Upload में गलती

कई बार इमेज फाइल सही से अपलोड नहीं होती या फाइल का नाम गलत होता है।

     

    • जैसे image1.JPG की जगह कोड में image1.jpg लिखा हो तो थंबनेल नहीं दिखेगा।

    • Image का path गलत होने पर ब्राउज़र उसे नहीं ढूंढ पाता।

समाधान:
Image का path (जैसे images/post1.jpg) सही चेक करें और फाइल नाम एकदम सही लिखें।

2. Featured Image सेट नहीं की गई

WordPress जैसे प्लेटफ़ॉर्म में हर पोस्ट के लिए Featured Image अलग से सेट करनी पड़ती है।
अगर आप केवल कंटेंट में इमेज डालते हैं, लेकिन Featured Image नहीं लगाते — तो homepage या archive पेज पर थंबनेल नहीं दिखेगा।

समाधान:
WordPress पोस्ट एडिटर में जाएं → दाईं ओर “Featured Image” सेक्शन → अपनी फोटो अपलोड करें।

3. Theme में कोडिंग समस्या

कई बार वेबसाइट की थीम में the_post_thumbnail() या समान कोड गायब होता है।
इसलिए सिस्टम इमेज को दिखा ही नहीं पाता।

समाधान:
थीम की single.php या content.php फाइल में यह कोड शामिल करें:

<?php the_post_thumbnail('medium'); ?>

फिर अपनी साइट रिफ्रेश करें।

4. Cache या CDN की समस्या

कभी-कभी पुराना डेटा cache में फंसा रहता है।
भले ही आप नया थंबनेल लगाएं, ब्राउज़र या CDN पुरानी इमेज ही दिखाता रहता है।

समाधान:

     

    • WordPress cache plugin (जैसे WP Rocket, W3 Total Cache) से cache clear करें।

    • अगर Cloudflare यूज़ करते हैं, तो वहाँ से भी cache purge करें।

5. Permission या File Access समस्या

अगर आपकी image file की permission सही नहीं है या सर्वर उसे पढ़ नहीं पा रहा, तो वह नहीं दिखेगी।

समाधान:
FTP या File Manager में जाकर image file के permission “644” करें और फ़ोल्डर permission “755” रखें।

6. Wrong Image Format या Broken File

कभी-कभी इमेज corrupt हो जाती है या unsupported format (जैसे .tiff, .heic) में होती है।

समाधान:
Image को .jpg, .png, या .webp format में convert करें और दोबारा upload करें।

7. Open Graph Meta Tag गायब होना (Social Share Issue)

अगर Facebook, WhatsApp या Telegram पर थंबनेल नहीं दिख रहा है —
तो इसका कारण है कि पेज में Open Graph meta tag नहीं है।

            चाहे तो देए गए वीडियोमें भी देख सकते हैं 

समाधान:
HTML के <head> टैग में यह कोड डालें:

<meta property="og:image" content="https://example.com/image.jpg" />
<meta property="og:title" content="आपके आर्टिकल का शीर्षक" />
<meta property="og:description" content="संक्षिप्त विवरण" />


HTML वेबसाइट में थंबनेल कैसे लगाएं

अगर आप अपनी खुद की वेबसाइट HTML, CSS और JavaScript से बना रहे हैं, तो इस तरह थंबनेल जोड़ सकते हैं:

<div>
  <img src="images/article-thumbnail.jpg" alt="Article Thumbnail" />
  <h2>थंबनेल नहीं लग रहा है | Thumbnails Not Showing</h2>
  <p>इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि थंबनेल क्यों नहीं दिखते और इसे कैसे ठीक करें...</p>
</div>

और CSS से इसे सुंदर बनाएं:

.thumbnail {
  width: 100%;
  max-width: 300px;
  border-radius: 10px;
  box-shadow: 0px 0px 10px rgba(0,0,0,0.2);
}

यूट्यूब या सोशल मीडिया पर थंबनेल नहीं दिखने के कारण

अगर आपका थंबनेल यूट्यूब पर नहीं दिख रहा है, तो कारण अलग हो सकते हैं:

     

    1. थंबनेल बहुत बड़ा है (2 MB से ज्यादा)।

    1. Format गलत है (केवल JPG, PNG और GIF चलते हैं)।

    1. यूट्यूब ने आपकी फ़ाइल reject की।

    1. Cache या network delay।

Solution:

     

    • थंबनेल का साइज़ 1280×720 pixels रखें।

    • File size 2MB से कम रखें।

    • Format .jpg या .png रखें।

    • Upload के बाद कुछ मिनट इंतज़ार करें — यूट्यूब को प्रोसेस करने में समय लगता है।

वेबसाइट पर Thumbnail Debug कैसे करें

अगर आपकी वेबसाइट का थंबनेल सोशल मीडिया पर नहीं दिख रहा है,
तो ये tools काम आएंगे:

     

    1. Facebook Debugger:
      https://developers.facebook.com/tools/debug

    1. Twitter Card Validator:
      https://cards-dev.twitter.com/validator

    1. LinkedIn Post Inspector:
      https://www.linkedin.com/post-inspector/

इन टूल्स से पता चलेगा कि आपकी वेबसाइट के meta tags सही हैं या नहीं।

थंबनेल SEO का महत्व

थंबनेल केवल एक तस्वीर नहीं होता, यह SEO में भी बड़ा रोल निभाता है।
सर्च इंजन के लिए थंबनेल बताता है कि आपकी पोस्ट किस बारे में है।

थंबनेल के लिए SEO टिप्स:

     

    • File का नाम keyword के साथ रखें (जैसे thumbnail-not-showing.jpg)

    • Alt टैग में description लिखें

    • Image को compress करें ताकि page speed बेहतर रहे


थंबनेल दिखाने के लिए Quick Checklist

चेकपॉइंट हाँ/नहीं
Featured Image सेट की है? ✅
Image path सही है? ✅
Cache clear किया है? ✅
Format .jpg या .png है? ✅
Open Graph meta tag लगाया है? ✅

निष्कर्ष

थंबनेल किसी भी ऑनलाइन कंटेंट की पहली झलक होता है।
अगर यह नहीं दिखता, तो कंटेंट अधूरा लगता है और क्लिक रेट भी घटता है।
लेकिन अच्छी बात यह है कि इस समस्या का हल आसान है —
बस image path, format, cache और meta tags पर थोड़ा ध्यान दें।

अगर आप WordPress, Blog

 

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stock market price action strategy शेयर बाजार मूल्य कार्रवाई रणनीति

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जैसा आप सभी जानते हैं | कि investing setup बिल्कुल जेनुइन इनफॉरमेशन प्रोवाइड करतl है | और मैं 2019 से इंवॉल्व हूं स्टॉक  मार्केट में इसी एक्सपीरियंस से  इन्वेस्टिंग और ट्रेडिंग और भी बहुत सरे ऑनलाइन अर्निंग से रिलेटेड आर्टिकल मिल जाएगा | जो फाइनेंशली फ्रीडम अचीव कर सकते हैं इसलिए  लेख को  ध्यान पूर्वक  से पढ़े .आज , अगर आप शेयर बाजार (Stock Market) में ट्रेडिंग या निवेश करते हैं, तो आपने “Price Action” शब्द जरूर सुना होगा। आजकल ज्यादातर प्रोफेशनल ट्रेडर्स बिना किसी भारी-भरकम इंडिकेटर्स के केवल Price Action Strategy का इस्तेमाल करके अच्छे मुनाफे कमाते हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि आखिर यह Price Action Strategy होती क्या है? इसे कैसे समझें और कैसे अपने ट्रेडिंग प्लान में शामिल करें?

इस आर्टिकल में हम आपको शेयर बाजार मूल्य कार्रवाई रणनीति (Price Action Strategy in Stock Market) के बारे में पूरी जानकारी देंगे, वो भी आसान भाषा और उदाहरणों के साथ।

1.Price Action क्या है?

Price Action का सीधा मतलब है – शेयर के दामों की चाल (Price Movement) को समझकर ट्रेड करना।

यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें हम चार्ट (Chart) को देखकर, उसके प्राइस मूवमेंट, पैटर्न और कैंडलस्टिक (Candlestick Patterns) का अध्ययन करते हैं और बिना ज्यादा Indicators पर भरोसा किए फैसले लेते हैं।

👉 आसान शब्दों में कहें तो – Price Action Strategy = “Chart पढ़ना + Price की Story समझना”।

 2.Price Action क्यों जरूरी है?

आज के समय में हज़ारों Technical Indicators मौजूद हैं – RSI, MACD, Bollinger Bands, Moving Average आदि। लेकिन इन सबकी जड़ Price ही है।

⚡हर Indicator प्राइस के हिसाब से ही सिग्नल देता है।

⚡Indicator हमेशा प्राइस के बाद प्रतिक्रिया करता है (lagging effect)।

⚡जबकि Price Action हमें सबसे पहले Market की असली चाल बताता है।

यानी अगर आप Price Action समझ लेते हैं, तो आपको Indicator पर ज्यादा निर्भर रहने की ज़रूरत नहीं होगी।

3.Price Action Strategy की मुख्य बातें

Price Action Strategy को समझने और इस्तेमाल करने के लिए कुछ ज़रूरी बातें होती हैं:

  1. Support और Resistance LevelsSupport वह लेवल होता है जहाँ शेयर गिरकर रुकने लगता है।
  2. Resistance वह लेवल होता है जहाँ शेयर ऊपर जाकर रुकने लगता है। 👉 Price Action में इन लेवल्स का बड़ा महत्व है।
  3. Trend (Trend पहचानना)Uptrend = जब प्राइस लगातार ऊपर की ओर जा रहा हो।
  4. Downtrend = जब प्राइस लगातार नीचे जा रहा हो।
  5. Sideways = जब प्राइस न ऊपर जाए, न नीचे – बल्कि एक रेंज में घूमे।
  6. Candlestick PatternsDoji, Hammer, Shooting Star, Engulfing आदि पैटर्न्स Price Action में अहम भूमिका निभाते हैं।
  7. ये पैटर्न हमें बताते हैं कि Buyers (खरीददार) मजबूत हैं या Sellers (बेचने वाले)।
  8. Breakouts और Fakeoutsजब प्राइस Resistance तोड़कर ऊपर निकलता है = Breakoutजब प्राइस Resistance तोड़कर तुरंत वापस आ जाता है = Fakeout
  9. Volume का महत्वअगर Breakout के समय Volume ज्यादा है = मजबूत Breakout
  10. अगर Volume कम है = कमजोर Breakout

3 .Price Action Strategy के प्रकार

Price Action Strategy को कई तरीकों से इस्तेमाल किया जाता है। आइए कुछ मशहूर स्ट्रैटेजी समझते हैं:

1. Trend Trading Strategy

⚡इसमें ट्रेडर केवल Trend के हिसाब से Buy या Sell करता है।

नियम:

⚡Uptrend → Buy on Dips

⚡Downtrend → Sell on Rise

उदाहरण: अगर Nifty 50 लगातार Uptrend में है और बीच-बीच में थोड़ा गिरता है, तो गिरावट पर खरीदकर बड़ा फायदा मिल सकता है।

2. Support & Resistance Strategy

⚡जब प्राइस Support पर आता है → Buy

⚡जब प्राइस Resistance पर आता है → Sell

उदाहरण: अगर Infosys का शेयर बार-बार ₹1500 पर Support ले रहा है, तो उस लेवल पर खरीदना अच्छा मौका हो सकता है।

3. Breakout Strategy

⚡जब प्राइस Resistance तोड़कर ऊपर निकले → Buy

⚡जब प्राइस Support तोड़कर नीचे निकले → Sell

उदाहरण: अगर Reliance ₹2500 के ऊपर क्लोज करता है और Volume ज्यादा है, तो इसमें Breakout Trading की जा सकती है।

4. Candlestick Pattern Strategy

⚡खास पैटर्न देखकर ट्रेड लेना।

⚡उदाहरण:

⚡Hammer → Reversal Signal (नीचे से ऊपर की ओर)

⚡Shooting Star → Reversal Signal (ऊपर से नीचे की ओर)

⚡Bullish Engulfing → Buyers की ताकत

⚡Bearish Engulfing → Sellers की ताकत

5. Range Trading Strategy

⚡जब शेयर Sideways मूवमेंट में हो।

⚡नियम:

⚡Range के नीचे → Buy

⚡Range के ऊपर → Sell

उदाहरण: अगर TCS 3200 से 3400 के बीच घूम रहा है, तो 3200 पर खरीदें और 3400 पर बेचें।

4.Price Action Strategy का सही इस्तेमाल कैसे करें?

  1. Market Structure समझें → पहले देखें Trend क्या है।
  2. Key Levels Mark करें → Support & Resistance की पहचान करें।
  3. Confirmation लें → Candlestick Pattern या Volume से पुष्टि करें।
  4. Risk Management करें → Stop Loss लगाना जरूरी है।
  5. Patience रखें → हर दिन ट्रेड जरूरी नहीं है, सही मौके का इंतज़ार करें।

5.Price Action Strategy के फायदे

✅ साफ-सुथरी रणनीति – ज्यादा Indicators की ज़रूरत नहीं। ✅ Market को उसके असली रूप में समझना आसान। ✅ किसी भी टाइमफ्रेम (1 min, 5 min, Daily, Weekly) पर काम करता है। ✅ Intraday, Swing और Positional ट्रेडिंग – हर जगह इस्तेमाल कर सकते हैं।

6. Price Action Strategy की सीमाएँ (Limitations)

❌ हर बार सटीक काम नहीं करती। ❌ Fake Breakouts में फंसने का खतरा रहता है। ❌ Beginners को शुरुआत में समझने में मुश्किल। ❌ Risk Management के बिना बड़ा नुकसान हो सकता है।

7.नए ट्रेडर्स के लिए सुझाव

⚡पहले छोटे Timeframe की बजाय Daily Chart पर अभ्यास करें।

⚡हर दिन 2-3 शेयर चुनें और उनकी Price Movement को Study करें।

⚡शुरुआत में Paper Trading करें (बिना असली पैसे के)।

⚡जब Confidence बने तभी असली पैसे से ट्रेड शुरू करें।

8.Real-Life Example (HDFC Bank Case Study)

मान लीजिए HDFC Bank का शेयर ₹1500 पर बार-बार गिरकर रुक रहा है। 👉 इसका मतलब है यह एक Strong Support है।

⚡अगर शेयर ₹1500 पर Hammer Candlestick बनाता है → Buy Signal

⚡Target = ₹1600 (Resistance Level)

⚡Stop Loss = ₹1475

इस तरह आप केवल Price Action देखकर अच्छा ट्रेड ले सकते हैं।

➡️ निष्कर्ष (Conclusion)

Price Action Strategy शेयर बाजार की सबसे सटीक और सरल ट्रेडिंग रणनीतियों में से एक है। इसमें हमें केवल Price Movement, Candlestick Patterns और Support-Resistance पर ध्यान देना होता है। अगर आप इसे अच्छे से सीख लेते हैं तो बिना किसी जटिल Indicator के भी आप Market की दिशा समझ सकते हैं।

👉 याद रखें –

🔥Price ही Market का असली Boss है।

🔥Indicators सिर्फ Price के बाद आने वाली जानकारी दिखाते हैं।

🔥अगर Price पढ़ना सीख गए, तो Market समझना आसान हो जाएगा।

स्विंग ट्रेडिंग क्या है ? हिंदी में what is swing trading in hindi

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जैसा आप सभी जानते हैं | कि investing setup बिल्कुल जेनुइन इनफॉरमेशन प्रोवाइड करतl है | और मैं 2019 से इंवॉल्व हूं इसी एक्सपीरियंस से स्टॉक मार्केट इन्वेस्टिंग और ट्रेडिंग और भी बहुत सरे ऑनलाइन अर्निंग से रिलेटेड आर्टिकल मिल जाएगा | जो फाइनेंशली फ्रीडम अचीव कर सकते हैं इसलिए  लेख को  ध्यान पूर्वक  से पढ़े.अगर आप शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग करते हैं, तो आपने “स्विंग ट्रेडिंग” का नाम जरूर सुना होगा। यह न तो बहुत तेज़ (Intraday) होती है और न ही बहुत लंबी अवधि की (Long-term investment)। बल्कि, यह दोनों के बीच का एक स्मार्ट तरीका है, जिसमें आप कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ़्तों तक स्टॉक होल्ड करके प्रॉफिट कमाने की कोशिश करते हैं।

1. परिचय

अगर आप शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग करते हैं, तो आपने “स्विंग ट्रेडिंग” का नाम जरूर सुना होगा। यह न तो बहुत तेज़ (Intraday) होती है और न ही बहुत लंबी अवधि की (Long-term investment)। बल्कि, यह दोनों के बीच का एक स्मार्ट तरीका है, जिसमें आप कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ़्तों तक स्टॉक होल्ड करके प्रॉफिट कमाने की कोशिश करते हैं। सीधे शब्दों में, स्विंग ट्रेडिंग का मतलब है ट्रेंड पकड़कर उसमें सवार होना, और जब ट्रेंड बदलने लगे तो मुनाफा लेकर बाहर निकल जाना।

 

2. स्विंग ट्रेडिंग की परिभाषा

स्विंग ट्रेडिंग एक ऐसी ट्रेडिंग रणनीति है जिसमें ट्रेडर स्टॉक, कमोडिटी, या किसी भी फाइनेंशियल एसेट को 2-3 दिन से लेकर 2-3 हफ़्तों तक होल्ड करता है। इसका मुख्य लक्ष्य मध्यम अवधि के प्राइस मूवमेंट से फायदा उठाना होता है।

Intraday Trading → ट्रेड एक ही दिन में खत्म।

Swing Trading → कुछ दिन से कुछ हफ्ते तक पोजीशन होल्ड।

Position Trading → कई महीने या साल तक होल्ड।

 

3. स्विंग ट्रेडिंग कैसे काम करती है?

स्विंग ट्रेडिंग में, आप चार्ट, पैटर्न, और टेक्निकल इंडिकेटर्स देखकर यह तय करते हैं कि स्टॉक उपर (Bullish) जाने वाला है या नीचे (Bearish)।

काम करने के स्टेप्स:

1. स्टॉक चुनना – वॉल्यूम और वोलैटिलिटी अच्छे वाले स्टॉक से शुरुआत।

2. ट्रेंड पहचानना – अपट्रेंड, डाउनट्रेंड, या साइडवेज़।

3. एंट्री पॉइंट तय करना – कब खरीदना या बेचना है।

4. टारगेट और स्टॉप लॉस सेट करना – प्रॉफिट और रिस्क लिमिट।

5. एक्जिट करना – ट्रेंड बदलते ही पोजीशन बंद।

 

4. स्विंग ट्रेडिंग का एक आसान उदाहरण

मान लीजिए ABC Ltd का शेयर ₹100 पर है। आप चार्ट देखकर पाते हैं कि यह ₹115 तक जा सकता है।

आपने 100 शेयर खरीदे ₹100 के हिसाब से (कुल ₹10,000)।

5 दिन में शेयर ₹115 हो गया।

आपने सेल कर दिया और ₹15 × 100 = ₹1500 का मुनाफा ले लिया।

अगर ट्रेंड उल्टा जाता, तो स्टॉप लॉस (जैसे ₹95) पर बेचकर नुकसान सीमित रखते।

 

5. स्विंग ट्रेडिंग बनाम इंट्राडे ट्रेडिंग

पैरामीटर स्विंग ट्रेडिंग इंट्राडे ट्रेडिंग

होल्डिंग टाइम कुछ दिन से कुछ हफ्ते कुछ मिनट से कुछ घंटे
रिस्क लेवल मीडियम हाई
टाइम रीक्वायरमेंट कम ज्यादा
एनालिसिस टाइप डेली / 4-घंटे का चार्ट मिनट / सेकंड का चार्ट
स्ट्रेस लेवल कम ज्यादा

 

6. स्विंग ट्रेडिंग में इस्तेमाल होने वाले टूल्स

(A) टेक्निकल इंडिकेटर्स

Moving Averages (MA) – ट्रेंड पहचानने के लिए।

Relative Strength Index (RSI) – ओवरबॉट/ओवरसोल्ड लेवल जानने के लिए।

MACD – ट्रेंड रिवर्सल पकड़ने के लिए।

Bollinger Bands – प्राइस वोलैटिलिटी जानने के लिए।

(B) चार्ट पैटर्न्स

Head & Shoulders

Double Top / Bottom

Cup & Handle

Flag & Pennant

 

7. स्विंग ट्रेडिंग के फायदे

1. कम समय की जरूरत – आपको पूरे दिन स्क्रीन से चिपके रहने की जरूरत नहीं।

2. अच्छा रिस्क-रिवॉर्ड – अगर सही स्टॉक चुना तो 1-2 हफ्तों में अच्छा रिटर्न।

3. कम ब्रोकरेज – इंट्राडे की तुलना में कम ट्रेडिंग होती है।

4. फ्लेक्सिबिलिटी – जॉब करने वाले लोग भी कर सकते हैं।

 

8. स्विंग ट्रेडिंग के नुकसान / रिस्क

1. ओवरनाइट रिस्क – मार्केट में रातभर या वीकेंड में अचानक खबर आ सकती है।

2. गलत ट्रेंड पकड़ना – गलत एनालिसिस से नुकसान।

3. गैप-अप/गैप-डाउन ओपनिंग – प्राइस में अचानक उछाल या गिरावट।

4. इमोशनल डिसीजन – लालच या डर से समय पर एक्जिट न करना।

 

9. स्विंग ट्रेडिंग के

लिए जरूरी स्किल्स

टेक्निकल एनालिसिस की अच्छी समझ।

रिस्क मैनेजमेंट – हर ट्रेड में 1-2% से ज्यादा रिस्क न लेना।

पेशेंस – सही मौके का इंतजार करना।

मार्केट न्यूज पर नजर – कॉर्पोरेट रिजल्ट, बजट, RBI पॉलिसी आदि।

 

10. स्विंग ट्रेडिंग के लिए सही स्टॉक कैसे चुनें?

High Liquidity – जिसमें खरीदने-बेचने वाले ज्यादा हों।

Good Volatility – प्राइस मूवमेंट अच्छा हो।

Positive News Flow – कंपनी के बारे में अच्छी खबरें।

सेक्टर ट्रेंड – जिस सेक्टर में तेजी हो, उसी में स्टॉक चुनें।

 

11. स्विंग ट्रेडिंग के लिए टाइम फ्रेम

एंट्री के लिए → 1-घंटे या 4-घंटे का चार्ट।

कन्फर्मेशन के लिए → डेली चार्ट।

स्टॉप लॉस तय करने के लिए → सपोर्ट-रेजिस्टेंस लेवल।

 

12. स्विंग ट्रेडिंग में रिस्क मैनेजमेंट

स्टॉप लॉस जरूरी – ताकि बड़ा नुकसान न हो।

पोजीशन साइज छोटा रखें – एक ट्रेड में पूरी कैपिटल न लगाएं।

डायवर्सिफिकेशन – एक साथ 3-4 अलग सेक्टर के स्टॉक।

 

13. स्विंग ट्रेडिंग के गोल्डन टिप्स

1. ट्रेंड के खिलाफ ट्रेड न करें।

2. लालच में आकर टारगेट बढ़ाते न रहें।

3. हमेशा प्लान बनाकर चलें – Entry, Target, Stop Loss।

4. न्यूज और इवेंट्स पर नजर रखें।

5. लॉग बुक बनाएं – अपने ट्रेड्स का रिकॉर्ड रखें।

 

14. शुरुआती लोगों के लिए एक सिंपल स्ट्रेटेजी

“Moving Average Crossover Strategy”

50-day MA और 200-day MA यूज़ करें।

जब 50-day MA, 200-day MA को ऊपर से काटे → Buy Signal।

जब 50-day MA, 200-day MA को नीचे से काटे → Sell Signal।

यह बेसिक है, लेकिन ट्रेंड पकड़ने में मददगार है।

 

➡️ निष्कर्ष

स्विंग ट्रेडिंग उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो कम समय में अच्छा रिटर्न चाहते हैं, लेकिन दिनभर स्क्रीन के सामने नहीं बैठ सकते। इसमें टेक्निकल एनालिसिस और रिस्क मैनेजमेंट की समझ जरूरी है।

अगर आप शुरुआत कर रहे हैं, तो पहले पेपर ट्रेडिंग (डेमो) करें, फिर धीरे-धीरे छोटे कैपिटल से असली ट्रेडिंग शुरू करें। याद रखें, मार्केट में जल्दी अमीर बनने का कोई शॉर्टकट नहीं है, लेकिन सही रणनीति और अनुशासन से स्विंग ट्रेडिंग एक स्थिर इनकम का जरिया बन सकती है।

अगर आप चाहें तो मैं इसके साथ एक आसान “स्विंग ट्रेडिंग  स्ट्रेटेजी जानने के लिए दूसरा आर्टिकल जरूर पढ़ें 👇

 

पोजीशन ट्रेडिंग क्या है what is position trading

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जैसा आप सभी जानते हैं | कि investing setup बिल्कुल जेनुइन इनफॉरमेशन प्रोवाइड करतl है | और मैं 2019 से इंवॉल्व हूं इसी एक्सपीरियंस से स्टॉक मार्केट इन्वेस्टिंग और ट्रेडिंग और भी बहुत सरे ऑनलाइन अर्निंग से रिलेटेड आर्टिकल मिल जाएगा | जो फाइनेंशली फ्रीडम अचीव कर सकते हैं इस  लेख को  ध्यान पूर्वक  से पढ़े। इस आर्टिकल में पोजीशनल ट्रेडिंग क्या है इसी के विषय में जानकारी दी गई हैं

पोजीशन ट्रेडिंग क्या है?

पोजीशन ट्रेडिंग शेयर मार्केट की एक ऐसी ट्रेडिंग रणनीति है जिसमें ट्रेडर या निवेशक किसी स्टॉक, इंडेक्स, कमोडिटी या करेंसी को लंबे समय के लिए होल्ड करता है — हफ्तों, महीनों या कई बार सालों तक — ताकि बड़े प्राइस मूव का फायदा उठा सके।

इसे आप ऐसे समझें👇

इंट्राडे ट्रेडिंग → दिन भर में खरीदना और बेचना।

स्विंग ट्रेडिंग → कुछ दिन या हफ्तों तक होल्ड करना।

पोजीशन ट्रेडिंग → कई महीने या साल तक होल्ड करना।

मतलब, अगर आप किसी कंपनी का स्टॉक खरीदते हैं और सोचते हैं, “ये 6 महीने या 1 साल में दोगुना हो सकता है”, तो आप पोजीशन ट्रेडिंग कर रहे हैं।

 

पोजीशन ट्रेडिंग कैसे काम करती है?

पोजीशन ट्रेडिंग का बेसिक आइडिया है —

> “Trend को पकड़ो, और तब तक होल्ड करो जब तक वह बड़ा फायदा न दे दे।”

 

इसमें आपको चार्ट एनालिसिस (Technical Analysis) और कंपनी या सेक्टर का फंडामेंटल एनालिसिस दोनों समझना ज़रूरी है, ताकि आप सही एंट्री और एग्ज़िट ले सकें।

स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

1. ट्रेंड पहचानना
मार्केट में अभी कौन सा सेक्टर या स्टॉक अपट्रेंड (ऊपर जाने वाला) है, ये पता करें।

2. टेक्निकल और फंडामेंटल चेक

फंडामेंटल: कंपनी का प्रॉफिट, सेल्स, ग्रोथ, मैनेजमेंट, सेक्टर पोज़िशन।

टेक्निकल: मूविंग एवरेज, ट्रेंडलाइन, सपोर्ट-रेज़िस्टेंस।

 

3. एंट्री पॉइंट
सही समय पर खरीदें — आमतौर पर तब जब ट्रेंड कन्फर्म हो और स्टॉक ब्रेकआउट दे रहा हो।

4. होल्ड करना
धैर्य रखें। पोजीशन ट्रेडिंग में “जल्दी बेचने की आदत” नुकसान कर सकती है।

5. एग्ज़िट पॉइंट
टार्गेट पूरा होते ही बेचें या ट्रेंड रिवर्स होते ही बाहर निकल जाएं।

 

 

पोजीशन ट्रेडिंग का उदाहरण

मान लीजिए 2020 में टाटा मोटर्स का स्टॉक ₹70 पर था।
उस समय ऑटो सेक्टर में रिकवरी के संकेत मिल रहे थे, और कंपनी के EV (Electric Vehicle) प्लान चर्चा में थे।

अगर आपने रिसर्च करके ₹70 पर खरीदा और 1-1.5 साल तक होल्ड किया, तो 2022 में ये ₹500 के आसपास चला गया।
मतलब — आपका पैसा लगभग 7 गुना हो गया।

यही पोजीशन ट्रेडिंग का असली जादू है — लंबा धैर्य, बड़ा फायदा।

पोजीशन ट्रेडिंग के लिए ज़रूरी स्किल्स

1. फंडामेंटल एनालिसिस

कंपनी का बैलेंस शीट पढ़ना

प्रॉफिट और लॉस ट्रेंड देखना

सेक्टर की ग्रोथ संभावना

2. टेक्निकल एनालिसिस

चार्ट पैटर्न पहचानना (ब्रेकआउट, फ्लैग, कप एंड हैंडल)

मूविंग एवरेज (50-DMA, 200-DMA)

वॉल्यूम एनालिसिस

3. धैर्य और डिसिप्लिन

मार्केट के छोटे उतार-चढ़ाव से परेशान न होना

अपने प्लान पर टिके रहना

4. रिस्क मैनेजमेंट

एक ही स्टॉक में बहुत ज्यादा पैसा न लगाना

स्टॉप लॉस और टार्गेट सेट करना

पोजीशन ट्रेडिंग और निवेश में फर्क

फैक्टर पोजीशन ट्रेडिंग लॉन्ग-टर्म निवेश

होल्डिंग टाइम कुछ महीने से 2-3 साल 5-10 साल या उससे ज्यादा
फोकस प्राइस ट्रेंड + फंडामेंटल फंडामेंटल ग्रोथ
एग्ज़िट प्लान टार्गेट या ट्रेंड रिवर्स रिटायरमेंट या लंबे गोल
एनालिसिस टेक्निकल + फंडामेंटल मुख्यतः फंडामेंटल

पोजीशन ट्रेडिंग के फायदे

1. बड़ा प्रॉफिट पोटेंशियल
लंबी मूव पकड़ने से बड़ा रिटर्न मिलता है।

2. कम ट्रेडिंग फ्रिक्वेंसी
रोज़-रोज़ ट्रेड करने की ज़रूरत नहीं।

3. टाइम की बचत
ऑफिस, बिजनेस या पढ़ाई करने वालों के लिए आसान।

4. कम स्ट्रेस
इंट्राडे जैसी टेंशन नहीं।

पोजीशन ट्रेडिंग के नुकसान / रिस्क

1. मार्केट रिवर्सल रिस्क
अचानक ट्रेंड बदलने पर नुकसान हो सकता है।

2. कैपिटल ब्लॉक होना
लंबे समय तक पैसा एक स्टॉक में फंसा रहता है।

3. धैर्य की परीक्षा
छोटे उतार-चढ़ाव में पैनिक होकर बेच सकते हैं।

4. गैप-डाउन ओपनिंग रिस्क
ओवरनाइट न्यूज़ से प्राइस अचानक गिर सकता है।

 

पोजीशन ट्रेडिंग के लिए बेस्ट स्ट्रेटेजीज़

1. ट्रेंड फॉलोइंग स्ट्रेटेजी

अपट्रेंड में खरीदो, डाउनट्रेंड में बेचो।

200-DMA से ऊपर के स्टॉक्स में ट्रेड करो।

2. ब्रेकआउट ट्रेडिंग

जब कोई स्टॉक लंबे समय के रेज़िस्टेंस को तोड़ता है, तब एंट्री लो।

3. सेक्टर-आधारित पोजीशन

किसी ग्रोथ सेक्टर (जैसे EV, Renewable Energy, Pharma) में अच्छे स्टॉक्स चुनना।

4. फंडामेंटल + टेक्निकल कॉम्बो

दोनों एनालिसिस को मिलाकर हाई-कन्फिडेंस ट्रेड बनाना।

रिस्क मैनेजमेंट टिप्स

हमेशा स्टॉप लॉस लगाएं, भले ही आप लंबा होल्ड कर रहे हों।

एक ट्रेड में अपने पोर्टफोलियो का 10-15% से ज्यादा पैसा न लगाएं।

समय-समय पर रिव्यू करें — अगर कंपनी का बिजनेस बिगड़ रहा है, तो बाहर निकलें।

कौन लोग पोजीशन ट्रेडिंग करें?

जिनके पास मार्केट देखने का ज्यादा टाइम नहीं है।

जो लंबी अवधि का ट्रेंड पकड़ना चाहते हैं।

जिनका धैर्य अच्छा है और भावनाओं पर कंट्रोल है।

निष्कर्ष↙️

पोजीशन ट्रेडिंग एक स्मार्ट और कम तनाव वाली ट्रेडिंग स्टाइल है, जिसमें सही स्टॉक और सही समय पर एंट्री लेकर लंबा होल्ड करने से बड़े मुनाफे कमाए जा सकते हैं।
लेकिन याद रखें — इसमें भी रिस्क है, इसलिए रिसर्च + डिसिप्लिन + रिस्क मैनेजमेंट तीनों ज़रूरी हैं।

अगर आप जल्दबाज़ी के बजाय धैर्य से काम कर सकते हैं, तो पोजीशन ट्रेडिंग आपके लिए एक बेहतरीन तरीका हो सकता है मार्केट में अच्छा रिटर्न पाने का।