google-site-verification=6xpALziFXrUirL6iqg4wCEjQhb3wObOmA8r1Kpa8SqQ How to Select Stocks for Swing Trading Archives - Investing setup.com ⚡iLet’s Grow TogetherStock market is not difficult, when you have sufficient knowledge. Investing and trading are fast earning per month easily. If you want to earn then learn first. Here I am sharing my 6 year Investing and trading experience with you & if you have any doubt then ask me…

स्विंग ट्रेडिंग के लिए स्टॉक कैसे चुने How to Select Stocks for Swing Trading

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जैसा आप सभी जानते हैं | कि investing setup बिल्कुल जेनुइन इनफॉरमेशन प्रोवाइड करतl है स्टॉक मार्केट सोशल मीडिया औरऑनलाइन अर्निंग से रिलेटेड आर्टिकल मिल जाएगा | जो फाइनेंशली फ्रीडम अचीव कर सकते हैं इसलिए  लेख को  ध्यान पूर्वक  से पढ़ें अगर आप शेयर मार्केट में लगातार बैठे-बैठे स्क्रीन पर नज़र नहीं रखना चाहते, लेकिन शॉर्ट टर्म (कुछ दिन से लेकर कुछ हफ्ते) में प्रॉफिट कमाना चाहते हैं, तो स्विंग ट्रेडिंग आपके लिए एक अच्छा विकल्प है।

स्विंग ट्रेडिंग में आप किसी स्टॉक की शॉर्ट-टर्म मूवमेंट पकड़ने की कोशिश करते हैं। मतलब यह कि स्टॉक का ट्रेंड (ऊपर या नीचे) कुछ दिनों या हफ्तों तक चलता है और आप उस स्विंग को पकड़कर मुनाफा कमाते हैं। लेकिन असली सवाल है –कौन सा स्टॉक चुनें? क्योंकि अगर आपने गलत स्टॉक चुन लिया, तो आपका सारा प्लान और मेहनत बेकार हो सकता है।इस आर्टिकल में हम विस्तार से समझेंगे कि स्विंग ट्रेडिंग के लिए सही स्टॉक चुनने की तकनीक क्या है, किन चीज़ों पर ध्यान देना चाहिए और कौन-कौन से टूल्स आपकी मदद करेंगे।

How to Select Stocks for Swing Trading

1. स्विंग ट्रेडिंग में स्टॉक चुनना क्यों ज़रूरी है?

हर स्टॉक स्विंग ट्रेडिंग के लिए सही नहीं होता। कुछ स्टॉक्स बहुत ज्यादा वोलैटाइल होते हैं, कुछ में वॉल्यूम नहीं होता, और कुछ में ट्रेंड साफ दिखाई नहीं देता।

अगर आप सही स्टॉक चुन लेते हैं तो:

• प्रॉफिट की संभावना बढ़ जाती है।

• रिस्क कंट्रोल में रहता है।

• कम समय में अच्छे रिटर्न मिल सकते हैं।

लेकिन अगर स्टॉक गलत चुन लिया तो नुकसान भी जल्दी हो सकता है।

2. स्विंग ट्रेडिंग के लिए स्टॉक चुनने के मुख्य नियम

(A) वॉल्यूम ज़रूरी है

• हमेशा ऐसे स्टॉक्स चुनें जिनमें अच्छा वॉल्यूम (Trading Volume) हो।

• वॉल्यूम से पता चलता है कि उस स्टॉक में खरीदने और बेचने वाले ज्यादा लोग हैं।

• कम वॉल्यूम वाले स्टॉक्स में अटकने का खतरा ज्यादा होता है।

उदाहरण: Nifty 50 या Midcap 100 के स्टॉक्स अक्सर वॉल्यूम के मामले में अच्छे रहते हैं।

(B) वोलैटिलिटी (Price Movement)

• स्विंग ट्रेडिंग का मकसद प्राइस मूवमेंट पकड़ना है।

• अगर स्टॉक की कीमत हिलती-डुलती ही नहीं, तो उसमें ट्रेडिंग का फायदा नहीं।

• ऐसे स्टॉक चुनें जिनमें रोज़ाना कम से कम 2-5% तक मूवमेंट आता हो।

हाई वोलैटाइल स्टॉक में रिस्क ज्यादा होता है, इसलिए बैलेंस्ड वोलैटिलिटी वाले स्टॉक्स बेहतर हैं।

(C) ट्रेंड की पहचान

• स्विंग ट्रेडिंग तभी काम करती है जब स्टॉक अपट्रेंड या डाउनट्रेंड में हो।

• ट्रेंडलेस (साइडवेज) स्टॉक्स से दूर रहें।

पहचान कैसे करें?

• अगर स्टॉक का प्राइस 50-DMA (50 दिन का मूविंग एवरेज) के ऊपर है तो वह अपट्रेंड में है।

• अगर प्राइस लगातार लोअर हाई और लोअर लो बना रहा है, तो वह डाउनट्रेंड में है।

(D) टेक्निकल पैटर्न्स देखें

• चार्ट पैटर्न्स स्विंग ट्रेडिंग में बहुत मदद करते हैं।

• खासकर ये पैटर्न्स अच्छे मौके देते हैं:Flag PatternCup & HandleDouble BottomTriangle Breakout

ये पैटर्न्स बताते हैं कि स्टॉक कहां से तेजी पकड़ सकता है।

(E) न्यूज़ और सेक्टर ट्रेंड

• कभी-कभी पूरा सेक्टर तेजी या मंदी में होता है।

• अगर सेक्टर पॉजिटिव है, तो उस सेक्टर के स्टॉक्स में स्विंग ट्रेडिंग आसान होती है।

• न्यूज़ बेस्ड स्टॉक्स में भी तेज मूवमेंट आता है।

उदाहरण: अगर सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोर देती है, तो L&T, IRB Infra जैसे स्टॉक्स में अच्छी स्विंग मिल सकती है।

3. स्टॉक्स को शॉर्टलिस्ट करने के टूल्स

(A) Screener Websites / Apps

• Moneycontrol

• TradingView

• Investing.com

• Zerodha Kite

यहां आप वॉल्यूम, प्राइस मूवमेंट, सेक्टर ट्रेंड, और पैटर्न्स के हिसाब से स्टॉक्स ढूंढ सकते हैं।

(B) मूविंग एवरेज

• 50-DMA और 200-DMA सबसे ज्यादा काम आते हैं।

• अगर 50-DMA, 200-DMA से ऊपर है → अपट्रेंड।

• अगर नीचे है → डाउनट्रेंड।

(C) RSI (Relative Strength Index)

• RSI बताता है कि स्टॉक ओवरबॉट (70 से ऊपर) है या ओवरसोल्ड (30 से नीचे)।

• स्विंग ट्रेडिंग के लिए RSI 40-60 के बीच वाले स्टॉक्स अच्छे होते हैं।

(D) MACD और Bollinger Bands

• MACD ट्रेंड बदलने का संकेत देता है।

• Bollinger Bands से पता चलता है कि स्टॉक ज्यादा ऊपर-नीचे तो नहीं गया।

4. स्टॉक चुनने का आसान Step-by-Step तरीका

1. लिक्विडिटी देखें → रोजाना का वॉल्यूम 5 लाख शेयर से ज्यादा होना चाहिए।

2. ट्रेंड पहचानें → स्टॉक अपट्रेंड या डाउनट्रेंड में हो।

3. वोलैटिलिटी चेक करें → रोजाना 2-5% मूवमेंट वाला स्टॉक लें।

4. टेक्निकल पैटर्न देखें → ब्रेकआउट या सपोर्ट लेवल पर हो।

5. इंडिकेटर्स से पुष्टि करें → RSI, MACD, Moving Average से ट्रेंड कन्फर्म करें।

6. स्टॉप लॉस तय करें → हर स्विंग ट्रेड में रिस्क लिमिट पहले से तय होनी चाहिए।

5. अच्छे स्विंग ट्रेडिंग स्टॉक्स के उदाहरण (भारत में)

(नोट: ये केवल शैक्षिक उद्देश्य से हैं, निवेश से पहले खुद रिसर्च करें)

• Reliance Industries

• HDFC Bank

• Tata Motors

• Infosys

• ICICI Bank

• Adani Enterprises

• Larsen & Toubro (L&T)

• Bajaj Finance

• Maruti Suzuki

• IRCTC

ये सभी स्टॉक्स वॉल्यूम, ट्रेंड और वोलैटिलिटी में अच्छे माने जाते हैं।

6. शुरुआती लोगों के लिए टिप्स

• छोटे-छोटे टारगेट रखें (5-10%)।

• एक बार में ज्यादा स्टॉक्स में ट्रेड न करें।

• स्टॉप लॉस हमेशा लगाएं।

• न्यूज़ और इवेंट्स पर ध्यान दें (जैसे रिजल्ट्स, बजट, RBI की पॉलिसी)।

• ज्यादा वोलैटाइल स्टॉक्स से दूर रहें।

7. गलतियां जो नहीं करनी चाहिए

• बिना रिसर्च किए ट्रेड करना।

• लो वॉल्यूम स्टॉक्स चुनना।

• साइडवेज स्टॉक्स में फंसना।

• लोभ में आकर बड़े टारगेट रखना।

• स्टॉप लॉस का पालन न करना।

📝निष्कर्ष

स्विंग ट्रेडिंग में सही स्टॉक चुनना ही सफलता की कुंजी है। इसके लिए आपको वॉल्यूम, ट्रेंड, वोलैटिलिटी, टेक्निकल पैटर्न्स और इंडिकेटर्स पर ध्यान देना होगा।

आसान शब्दों में कहें तो,

• ज्यादा ट्रेड होने वाला, ट्रेंड में चल रहा, और सही पैटर्न बना रहा स्टॉक → स्विंग ट्रेडिंग के लिए बेस्ट है।

अगर आप इन नियमों को फॉलो करेंगे तो आपकी स्विंग ट्रेडिंग की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाएगी।

स्विंग ट्रेडिंग क्या है ? हिंदी में what is swing trading in hindi

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जैसा आप सभी जानते हैं | कि investing setup बिल्कुल जेनुइन इनफॉरमेशन प्रोवाइड करतl है | और मैं 2019 से इंवॉल्व हूं इसी एक्सपीरियंस से स्टॉक मार्केट इन्वेस्टिंग और ट्रेडिंग और भी बहुत सरे ऑनलाइन अर्निंग से रिलेटेड आर्टिकल मिल जाएगा | जो फाइनेंशली फ्रीडम अचीव कर सकते हैं इसलिए  लेख को  ध्यान पूर्वक  से पढ़े.अगर आप शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग करते हैं, तो आपने “स्विंग ट्रेडिंग” का नाम जरूर सुना होगा। यह न तो बहुत तेज़ (Intraday) होती है और न ही बहुत लंबी अवधि की (Long-term investment)। बल्कि, यह दोनों के बीच का एक स्मार्ट तरीका है, जिसमें आप कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ़्तों तक स्टॉक होल्ड करके प्रॉफिट कमाने की कोशिश करते हैं।

1. परिचय

अगर आप शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग करते हैं, तो आपने “स्विंग ट्रेडिंग” का नाम जरूर सुना होगा। यह न तो बहुत तेज़ (Intraday) होती है और न ही बहुत लंबी अवधि की (Long-term investment)। बल्कि, यह दोनों के बीच का एक स्मार्ट तरीका है, जिसमें आप कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ़्तों तक स्टॉक होल्ड करके प्रॉफिट कमाने की कोशिश करते हैं। सीधे शब्दों में, स्विंग ट्रेडिंग का मतलब है ट्रेंड पकड़कर उसमें सवार होना, और जब ट्रेंड बदलने लगे तो मुनाफा लेकर बाहर निकल जाना।

 

2. स्विंग ट्रेडिंग की परिभाषा

स्विंग ट्रेडिंग एक ऐसी ट्रेडिंग रणनीति है जिसमें ट्रेडर स्टॉक, कमोडिटी, या किसी भी फाइनेंशियल एसेट को 2-3 दिन से लेकर 2-3 हफ़्तों तक होल्ड करता है। इसका मुख्य लक्ष्य मध्यम अवधि के प्राइस मूवमेंट से फायदा उठाना होता है।

Intraday Trading → ट्रेड एक ही दिन में खत्म।

Swing Trading → कुछ दिन से कुछ हफ्ते तक पोजीशन होल्ड।

Position Trading → कई महीने या साल तक होल्ड।

 

3. स्विंग ट्रेडिंग कैसे काम करती है?

स्विंग ट्रेडिंग में, आप चार्ट, पैटर्न, और टेक्निकल इंडिकेटर्स देखकर यह तय करते हैं कि स्टॉक उपर (Bullish) जाने वाला है या नीचे (Bearish)।

काम करने के स्टेप्स:

1. स्टॉक चुनना – वॉल्यूम और वोलैटिलिटी अच्छे वाले स्टॉक से शुरुआत।

2. ट्रेंड पहचानना – अपट्रेंड, डाउनट्रेंड, या साइडवेज़।

3. एंट्री पॉइंट तय करना – कब खरीदना या बेचना है।

4. टारगेट और स्टॉप लॉस सेट करना – प्रॉफिट और रिस्क लिमिट।

5. एक्जिट करना – ट्रेंड बदलते ही पोजीशन बंद।

 

4. स्विंग ट्रेडिंग का एक आसान उदाहरण

मान लीजिए ABC Ltd का शेयर ₹100 पर है। आप चार्ट देखकर पाते हैं कि यह ₹115 तक जा सकता है।

आपने 100 शेयर खरीदे ₹100 के हिसाब से (कुल ₹10,000)।

5 दिन में शेयर ₹115 हो गया।

आपने सेल कर दिया और ₹15 × 100 = ₹1500 का मुनाफा ले लिया।

अगर ट्रेंड उल्टा जाता, तो स्टॉप लॉस (जैसे ₹95) पर बेचकर नुकसान सीमित रखते।

 

5. स्विंग ट्रेडिंग बनाम इंट्राडे ट्रेडिंग

पैरामीटर स्विंग ट्रेडिंग इंट्राडे ट्रेडिंग

होल्डिंग टाइम कुछ दिन से कुछ हफ्ते कुछ मिनट से कुछ घंटे
रिस्क लेवल मीडियम हाई
टाइम रीक्वायरमेंट कम ज्यादा
एनालिसिस टाइप डेली / 4-घंटे का चार्ट मिनट / सेकंड का चार्ट
स्ट्रेस लेवल कम ज्यादा

 

6. स्विंग ट्रेडिंग में इस्तेमाल होने वाले टूल्स

(A) टेक्निकल इंडिकेटर्स

Moving Averages (MA) – ट्रेंड पहचानने के लिए।

Relative Strength Index (RSI) – ओवरबॉट/ओवरसोल्ड लेवल जानने के लिए।

MACD – ट्रेंड रिवर्सल पकड़ने के लिए।

Bollinger Bands – प्राइस वोलैटिलिटी जानने के लिए।

(B) चार्ट पैटर्न्स

Head & Shoulders

Double Top / Bottom

Cup & Handle

Flag & Pennant

 

7. स्विंग ट्रेडिंग के फायदे

1. कम समय की जरूरत – आपको पूरे दिन स्क्रीन से चिपके रहने की जरूरत नहीं।

2. अच्छा रिस्क-रिवॉर्ड – अगर सही स्टॉक चुना तो 1-2 हफ्तों में अच्छा रिटर्न।

3. कम ब्रोकरेज – इंट्राडे की तुलना में कम ट्रेडिंग होती है।

4. फ्लेक्सिबिलिटी – जॉब करने वाले लोग भी कर सकते हैं।

 

8. स्विंग ट्रेडिंग के नुकसान / रिस्क

1. ओवरनाइट रिस्क – मार्केट में रातभर या वीकेंड में अचानक खबर आ सकती है।

2. गलत ट्रेंड पकड़ना – गलत एनालिसिस से नुकसान।

3. गैप-अप/गैप-डाउन ओपनिंग – प्राइस में अचानक उछाल या गिरावट।

4. इमोशनल डिसीजन – लालच या डर से समय पर एक्जिट न करना।

 

9. स्विंग ट्रेडिंग के

लिए जरूरी स्किल्स

टेक्निकल एनालिसिस की अच्छी समझ।

रिस्क मैनेजमेंट – हर ट्रेड में 1-2% से ज्यादा रिस्क न लेना।

पेशेंस – सही मौके का इंतजार करना।

मार्केट न्यूज पर नजर – कॉर्पोरेट रिजल्ट, बजट, RBI पॉलिसी आदि।

 

10. स्विंग ट्रेडिंग के लिए सही स्टॉक कैसे चुनें?

High Liquidity – जिसमें खरीदने-बेचने वाले ज्यादा हों।

Good Volatility – प्राइस मूवमेंट अच्छा हो।

Positive News Flow – कंपनी के बारे में अच्छी खबरें।

सेक्टर ट्रेंड – जिस सेक्टर में तेजी हो, उसी में स्टॉक चुनें।

 

11. स्विंग ट्रेडिंग के लिए टाइम फ्रेम

एंट्री के लिए → 1-घंटे या 4-घंटे का चार्ट।

कन्फर्मेशन के लिए → डेली चार्ट।

स्टॉप लॉस तय करने के लिए → सपोर्ट-रेजिस्टेंस लेवल।

 

12. स्विंग ट्रेडिंग में रिस्क मैनेजमेंट

स्टॉप लॉस जरूरी – ताकि बड़ा नुकसान न हो।

पोजीशन साइज छोटा रखें – एक ट्रेड में पूरी कैपिटल न लगाएं।

डायवर्सिफिकेशन – एक साथ 3-4 अलग सेक्टर के स्टॉक।

 

13. स्विंग ट्रेडिंग के गोल्डन टिप्स

1. ट्रेंड के खिलाफ ट्रेड न करें।

2. लालच में आकर टारगेट बढ़ाते न रहें।

3. हमेशा प्लान बनाकर चलें – Entry, Target, Stop Loss।

4. न्यूज और इवेंट्स पर नजर रखें।

5. लॉग बुक बनाएं – अपने ट्रेड्स का रिकॉर्ड रखें।

 

14. शुरुआती लोगों के लिए एक सिंपल स्ट्रेटेजी

“Moving Average Crossover Strategy”

50-day MA और 200-day MA यूज़ करें।

जब 50-day MA, 200-day MA को ऊपर से काटे → Buy Signal।

जब 50-day MA, 200-day MA को नीचे से काटे → Sell Signal।

यह बेसिक है, लेकिन ट्रेंड पकड़ने में मददगार है।

 

➡️ निष्कर्ष

स्विंग ट्रेडिंग उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो कम समय में अच्छा रिटर्न चाहते हैं, लेकिन दिनभर स्क्रीन के सामने नहीं बैठ सकते। इसमें टेक्निकल एनालिसिस और रिस्क मैनेजमेंट की समझ जरूरी है।

अगर आप शुरुआत कर रहे हैं, तो पहले पेपर ट्रेडिंग (डेमो) करें, फिर धीरे-धीरे छोटे कैपिटल से असली ट्रेडिंग शुरू करें। याद रखें, मार्केट में जल्दी अमीर बनने का कोई शॉर्टकट नहीं है, लेकिन सही रणनीति और अनुशासन से स्विंग ट्रेडिंग एक स्थिर इनकम का जरिया बन सकती है।

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