google-site-verification=6xpALziFXrUirL6iqg4wCEjQhb3wObOmA8r1Kpa8SqQ mdshakirhussain817@gmail.com - Investing setup.com ⚡iLet’s Grow TogetherStock market is not difficult, when you have sufficient knowledge. Investing and trading are fast earning per month easily. If you want to earn then learn first. Here I am sharing my 6 year Investing and trading experience with you & if you have any doubt then ask me… - Page 7 of 11

How to invest in compounding चक्रवृद्धि ब्याज में निवेश कैसे करें

#Howtoinvestincompounding

जैसा आप सभी जानते हैं | कि investing setup बिल्कुल जेनुइन इनफॉरमेशन प्रोवाइड  करता है सोशल मीडिया औरऑनलाइन अर्निंग से रिलेटेड आर्टिकल मिल जाएगा | जो फाइनेंशली फ्रीडम अचीव कर सकते हैं इसलिए  लेख को  ध्यान पूर्वक  से पढ़ें क्या आपने कभी सोचा है कि छोटे-छोटे निवेश से भी करोड़ों की संपत्ति बनाई जा सकती है? अगर हां, तो इसका जवाब है — चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest)। ये कोई जादू नहीं है, बल्कि समय, धैर्य और स्मार्ट निवेश की ताकत है।

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि चक्रवृद्धि ब्याज क्या होता है? ये कैसे काम करता है? इसमें निवेश कैसे करें? किन माध्यमों से अधिक लाभ मिल सकता है? और कैसे एक आम व्यक्ति भी करोड़पति बन सकता है?

🔍 1. चक्रवृद्धि ब्याज क्या है?

चक्रवृद्धि ब्याज यानी “ब्याज पर भी ब्याज”। इसका मतलब है, अगर आपने ₹10,000 निवेश किए और सालाना 10% ब्याज मिल रहा है, तो पहले साल आपको ₹1,000 ब्याज मिलेगा।
अब दूसरे साल आपको ब्याज ₹11,000 पर मिलेगा, यानी ₹1,100।
तीसरे साल ₹12,100 पर ब्याज मिलेगा, यानी ₹1,210 और ऐसे ही यह बढ़ता रहेगा।

यही है चक्रवृद्धि की ताकत — ब्याज से ब्याज कमाना।

🧠 2. चक्रवृद्धि कैसे काम करता है? (How Compounding Works?)

चक्रवृद्धि ब्याज में तीन चीजें बहुत महत्वपूर्ण होती हैं:

तत्व क्यों जरूरी है?

⏳ समय (Time) जितना अधिक समय, उतनी अधिक वृद्धि
💸 दर (Rate) ब्याज की दर जितनी ज्यादा, उतना लाभ
🔁 पुनर्निवेश (Reinvestment) ब्याज को निकालें नहीं, दोबारा निवेश करें

चक्रवृद्धि का फॉर्मूला:

A = P (1 + r/n) ^ nt

जहाँ

A = कुल भविष्य की राशि

P = प्रारंभिक निवेश (Principal)

r = ब्याज दर (rate of interest)

n = साल में ब्याज कितनी बार जुड़ता है

t = कुल समय (वर्षों में)

🧮 3. उदाहरण से समझें चक्रवृद्धि की शक्ति

मान लीजिए आप ₹5,000 हर महीने 12% सालाना ब्याज दर पर 20 साल तक निवेश करते हैं।

कुल निवेश = ₹5,000 × 12 × 20 = ₹12,00,000

कुल रिटर्न = ₹50+ लाख से भी ज्यादा (SIP calculator के अनुसार)

यानि 12 लाख का निवेश आपको 50 लाख से ज्यादा बना सकता है — सिर्फ चक्रवृद्धि की मदद से!

💼 4. चक्रवृद्धि में निवेश कैसे करें? (How to Start Investing in Compounding)

✅ 1. SIP (Systematic Investment Plan)

क्या है: म्यूचुअल फंड में हर महीने एक तय राशि निवेश करना

क्यों बेहतर: लंबी अवधि में शानदार कंपाउंडिंग रिटर्न

फायदा: ₹500 से शुरुआत संभव

उदाहरण: अगर आप ₹2000 महीने का SIP 15 वर्षों तक करते हैं, 12% ब्याज के साथ, तो ₹3.6 लाख का निवेश ₹10 लाख से ज्यादा हो सकता है।

✅ 2. पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)

सरकारी योजना, 15 साल का लॉक-इन

ब्याज दर लगभग 7-8% सालाना (टैक्स फ्री)

चक्रवृद्धि दर: सालाना कंपाउंडिंग

उदाहरण: ₹1.5 लाख सालाना 15 साल तक निवेश करने पर ₹40+ लाख की राशि बन सकती है।

✅ 3. स्टॉक मार्केट में दीर्घकालिक निवेश

अगर आप अच्छी कंपनियों में लंबे समय तक निवेश करते हैं,

और डिविडेंड को दोबारा निवेश करते हैं,

तो चक्रवृद्धि का जबरदस्त लाभ मिलता है।

Warren Buffett ने यही तरीका अपनाया था — लंबी अवधि, सही कंपनियाँ, और धैर्य।

✅ 4. गोल्ड SIP / ETF

सोने में निवेश, पर डिजिटल रूप में

नियमित निवेश → कंपाउंडिंग रिटर्न

✅ 5. रिटायरमेंट प्लान / NPS (National Pension Scheme)

हर महीने राशि निवेश करें

ब्याज पर ब्याज मिलता है

रिटायरमेंट तक अच्छा फंड तैयार

✅ 6. Recurring Deposit (RD) और FD (With Compound Interest)

कुछ बैंक क्वार्टरली या मंथली कंपाउंडिंग देते हैं

सुरक्षित लेकिन रिटर्न सीमित

📋 5. कंपाउंडिंग के नियम और मंत्र (Golden Rules of Compounding)

नियम विवरण

📅 जल्दी शुरुआत करें जितना जल्दी शुरू करेंगे, उतना ज्यादा फायदा
🔁 ब्याज दोबारा निवेश करें पैसा बीच में न निकालें
🧘‍♂️ धैर्य रखें चमत्कार 10 साल बाद दिखने लगता है
🧠 समझदारी से निवेश करें SIP, PPF, Stock, Gold जैसे विकल्प चुनें
📊 कंपाउंडिंग कैलकुलेटर का उपयोग करें रिटर्न समझने और प्लानिंग के लिए

📆 6. कंपाउंडिंग का असली असर कब दिखता है?

पहले 5 साल: धीमी वृद्धि
5-10 साल: रफ्तार पकड़ना शुरू
10-20 साल: धनवर्षा शुरू!
20+ साल: करोड़पति बनने की शुरुआत!

इसलिए कहावत है

> “Compounding is the reward for the patient investor.”

📈 7. चक्रवृद्धि कैलकुलेटर कैसे चलाएं?

अगर आप यह जानना चाहते हैं कि भविष्य में कितना पैसा बनेगा, तो ऑनलाइन SIP Calculator या Compound Interest Calculator का उपयोग करें।

आपको चाहिए:

मासिक निवेश राशि

ब्याज दर

समयावधि

उदाहरण
₹3000/महीना, 12% ब्याज, 20 साल
➡ ₹21.6 लाख का निवेश
➡ ₹50 लाख से अधिक रिटर्न

💡 8. छात्रों और युवाओं के लिए खास सुझाव:

सुझाव कारण

कॉलेज से ही SIP शुरू करें ₹500 से भी शुरुआत संभव है
खर्च का 10% निवेश करें आदत में लाएं
सालों तक जारी रखें कंपाउंडिंग का असली जादू लंबी अवधि में है

🤔 9. आम गलतियाँ जो लोगों को बचानी चाहिए:

❌ केवल ब्याज दर देखकर निवेश न करें
❌ बार-बार पैसा निकालना
❌ बहुत कम समय के लिए निवेश करना
❌ बिना योजना के निवेश करना
❌ केवल FD में ही भरोसा करना

यह कुछ इंपॉर्टेंट जानकारी मेरे तरफ से था और भी अधिक जानकारी के लिए नीचे लेख दिया गया है

🏁 निष्कर्ष

चक्रवृद्धि ब्याज एक ऐसा जादू है जो समय, संयम और सही रणनीति के साथ आपके जीवन को आर्थिक रूप से बदल सकता है। अगर आपने आज ₹100 भी निवेश किया, तो वो आने वाले वर्षों में लाखों में बदल सकता है — बशर्ते आप उसे समय दें और दोबारा निवेश करते रहें।

“पैसे को काम पर लगाओ, ताकि एक दिन तुम्हें काम करने की ज़रूरत न पड़े।”

✨ अंत में एक मंत्र याद रखें

“जल्दी शुरू करें, नियमित निवेश करें, धैर्य रखें – चक्रवृद्धि को अपना काम करने दें।

अगर आप चाहें, तो मैं आपको एक पर्सनल कंपाउंडिंग प्लान बना सकता हूँ जिसमें आपकी उम्र, इनकम और गोल्स के अनुसार SIP, निवेश और टारगेट बताए जाएंगे। बताइए अगर आपको चाहिए।

 
 

 

How to make a thumbnailथंबनेल कैसे बनाएं

How to make a thumbnail
  • जैसा आप सभी जानते हैं | कि investing setup बिल्कुल जेनुइन इनफॉरमेशन प्रोवाइड करता है सोशल मीडिया औरऑनलाइन अर्निंग से रिलेटेड आर्टिकल मिल जाएगा | जो फाइनेंशली फ्रीडम अचीव कर सकते हैं इसलिए  लेख को  ध्यान पूर्वक  से पढ़ें आज के डिजिटल युग में थंबनेल (Thumbnail) एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, खासकर YouTube, Instagram Reels, Facebook Videos, ब्लॉग्स और अन्य विज़ुअल कंटेंट प्लेटफ़ॉर्म्स में।थंबनेल वह छोटा सा कवर इमेज होता है जिसे देखकर दर्शक यह तय करते हैं कि वीडियो या पोस्ट देखनी है या नहीं। इसलिए एक आकर्षक और क्लिक करने योग्य थंबनेल बनाना आपके कंटेंट की सफलता की चाबी बन सकता है। इस लेख में आप जानेंगे कि थंबनेल क्या होता है थंबनेल क्यों जरूरी है थंबनेल बनाने के टूल्स मोबाइल और लैपटॉप से थंबनेल कैसे बनाएं अच्छी थंबनेल डिज़ाइन करने की टिप्स SEO फ्रेंडली थंबनेल कैसे बनाएं और बहुत कुछ

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Best indicator for Option trading Bank Nifty ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए सर्वश्रेष्ठ संकेतक बैंक निफ्टी

Best indicator for Option trading Bank Nifty

Hi  फ्रेंड्स  InvestingSetup  मैं आपका  स्वागत है आज के समय में ऑनलाइन  अर्निंग का  बहुत साधन है उसी में से एक ऑप्शन ट्रेडिंग भी है और ट्रेड करने के लिए उसमें इंडिकेटर का जरूरत पड़ता है इस लेख में वही सिखाने वाले हैं कि बैंक निफ्टी (Bank Nifty) भारत के प्रमुख बैंकिंग शेयरों का इंडेक्स है, जिसमें देश के टॉप 12 बैंक शामिल होते हैं। यह इंडेक्स न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था की सेहत को दर्शाता है, बल्कि ट्रेडर्स के लिए सबसे लोकप्रिय और वोलैटाइल विकल्प भी है।

ऑप्शन ट्रेडिंग (Option Trading) एक प्रकार की डेरिवेटिव ट्रेडिंग है जिसमें आप किसी स्टॉक या इंडेक्स के भावों में उतार-चढ़ाव पर दांव लगाते हैं। चूंकि बैंक निफ्टी अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाला है, इसलिए इसमें सटीक संकेतक (Indicators) का उपयोग करना अत्यंत आवश्यक है।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि बैंक निफ्टी ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए सबसे बेहतरीन संकेतक (Best Indicators) कौन-कौन से हैं, उन्हें कैसे इस्तेमाल किया जाता है, और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

1. ऑप्शन ट्रेडिंग में संकेतक (Indicators) का महत्व

संकेतक ऐसे टूल्स होते हैं जो आपको यह समझने में मदद करते हैं कि

बाजार की दिशा क्या है?

कौन-सी एंट्री या एग्जिट पोजीशन लेना सही रहेगा?

कौन-सी स्ट्रैटेजी काम करेगी — Call या Put?

ट्रेंड की ताकत कितनी है?

बिना संकेतकों के ट्रेडिंग करना ऐसा है जैसे बिना नक्शे के यात्रा करना।

✅ बैंक निफ्टी ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए सर्वश्रेष्ठ संकेतक

नीचे दिए गए संकेतक बैंक निफ्टी ऑप्शन ट्रेडिंग में सबसे ज्यादा उपयोग किए जाते हैं:

1. VWAP (Volume Weighted Average Price)

VWAP ट्रेडिंग में यह जानने का सबसे विश्वसनीय संकेतक है कि संस्थागत निवेशक किस स्तर पर खरीद-बिक्री कर रहे हैं।

अगर प्राइस VWAP के ऊपर है → बुलिश (Call ऑप्शन पर विचार करें)

अगर प्राइस VWAP के नीचे है → बेयरिश (Put ऑप्शन पर विचार करें)

उपयोग कैसे करें?

VWAP को 5-मिनट या 15-मिनट के चार्ट पर लगाएं।

प्राइस और VWAP के बीच की दूरी को देख कर ट्रेंड की ताकत का अंदाजा लगाएं।

2. RSI (Relative Strength Index)

RSI यह बताता है कि बाजार ओवरबॉट (Overbought) है या ओवरसोल्ड (Oversold)।
बैंक निफ्टी ऑप्शन में यह रिवर्सल के समय काम आता है।

RSI > 70 → ओवरबॉट → गिरावट संभव (Put ऑप्शन)

RSI < 30 → ओवरसोल्ड → उछाल संभव (Call ऑप्शन)

टिप्स

5 या 15 मिनट के चार्ट पर RSI देखिए।

RSI के साथ MACD या VWAP को जोड़कर ट्रेड और मजबूत बना सकते हैं।

3. Open Interest (OI) + Option Chain Data

यह संकेतक ऑप्शन मार्केट की “भीतर की खबर” बताता है।
OI से पता चलता है कि बाजार में पैसा कहां लग रहा है।

Call OI बढ़ रहा है → रेसिस्टेंस स्ट्रॉन्ग है

Put OI बढ़ रहा है → सपोर्ट स्ट्रॉन्ग है

उदाहरण
अगर बैंक निफ्टी 48000 पर है और 48500 की कॉल में भारी OI है, तो वहां से गिरावट आ सकती है।

4. Supertrend Indicator

Supertrend एक ट्रेंड-फॉलोइंग संकेतक है, जो Buy और Sell के लिए सटीक एंट्री पॉइंट देता है।

Price Supertrend से ऊपर → Buy Signal (Call)

Price Supertrend से नीचे → Sell Signal (Put)

सेटिंग सुझाव

Period: 10

Multiplier: 3

यह संकेतक उन लोगों के लिए अच्छा है जो आसान सिग्नल ढूंढ़ते हैं।

5. Moving Averages (EMA – Exponential Moving Average)

बैंक निफ्टी ऑप्शन ट्रेडिंग में EMA बहुत फायदेमंद होता है, खासकर

9 EMA और 21 EMA का क्रॉसओवर देखकर।

जब 9 EMA, 21 EMA को ऊपर से काटे → डाउन ट्रेंड (Put)

जब 9 EMA, 21 EMA को नीचे से काटे → अपट्रेंड (Call)

Intraday में सुझाव
5min या 15min टाइमफ्रेम में 9 EMA और 21 EMA ट्रेंड कनफर्मेशन के लिए देखें।

6. MACD (Moving Average Convergence Divergence)

MACD आपको ट्रेंड और मोमेंटम दोनों की जानकारी देता है।

जब MACD लाइन सिग्नल लाइन को काटती है और ऊपर जाती है → Buy (Call)

जब MACD लाइन सिग्नल लाइन को काटती है और नीचे जाती है → Sell (Put)

MACD RSI या EMA के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने से बहुत अच्छे रिजल्ट मिलते हैं।

7. Bollinger Bands

बोलिंजर बैंड से आप जान सकते हैं कि बाजार कितनी वोलाटाइल है।

प्राइस जब अपर बैंड को छूए → रिवर्सल संभव (Put)

प्राइस जब लोअर बैंड को छूए → बाउंसबैक संभव (Call)

बैंक निफ्टी जैसे वोलाटाइल इंडेक्स के लिए यह बहुत उपयोगी है।

📊 बेस्ट इंडिकेटर्स कॉम्बिनेशन बैंक निफ्टी ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए

उद्देश्य संकेतकों का कॉम्बो

ट्रेंड पकड़ना VWAP + Supertrend
मोमेंटम चेक करना RSI + MACD
एंट्री/एग्जिट सिग्नल EMA (9, 21) + VWAP
सपोर्ट/रेजिस्टेंस OI Data + Option Chain + Bollinger Bands

⚠️ क्या ध्यान रखें: संकेतक सही काम करें, इसके लिए टिप्स

1. एक से अधिक संकेतक का इस्तेमाल करें — अकेला कोई भी संकेतक भरोसेमंद नहीं होता।

2. Backtest करें — हर संकेतक को लाइव ट्रेडिंग से पहले जरूर टेस्ट करें।

3. टाइमफ्रेम चुनें समझदारी से — 5-15 मिनट बैंक निफ्टी के लिए बेस्ट।

4. न्यूज़ और इवेंट्स का ध्यान रखें — RBI नीति, बजट या ग्लोबल इवेंट्स संकेतकों को फेल कर सकते हैं।

5. False Signals से बचें — संकेतक की पुष्टि दूसरे टूल्स से करें।

 

🧠 एक सच्चे ऑप्शन ट्रेडर की मानसिकता

1. संकेतक गाइड करते हैं, लेकिन निर्णय आपका होता है।

2. हर ट्रेड में Risk Management जरूरी है।

3. स्टॉपलॉस और टारगेट पहले से तय करें।

4. लालच और डर को साइड में रखें — ट्रेड लॉजिक से करें।

🔚 निष्कर्ष↙️

कौन-सा संकेतक सबसे अच्छा है?

सच्चाई यह है कि कोई एक “बेस्ट” संकेतक नहीं है, बल्कि सबसे अच्छा वही है जो:

आपके ट्रेडिंग स्टाइल से मेल खाता है,

आपने बैकटेस्ट किया है,

और जिसे आप कंसिस्टेंटली समझकर इस्तेमाल कर सकते हैं।

बैंक निफ्टी ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए VWAP, RSI, और OI डेटा का कॉम्बो सबसे अधिक प्रभावशाली माना जाता है। लेकिन यदि आप डे ट्रेडर हैं तो EMA + Supertrend + VWAP एक पावरफुल कॉम्बिनेशन हो सकता है।

 

 

ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए सबसे अच्छा इंडिकेटर कौन है? What is the best indicator for options trading?

#tredingkeliesabaseachchhasanketakkyahai

फ्रेंड्स Investingsetup मैं स्वागत है ऑप्शन ट्रेडिंग आज के समय में शेयर बाजार में पैसे कमाने का एक स्मार्ट तरीका बन गया है। इसमें आप किसी स्टॉक को खरीदे बिना उसके ऊपर शर्त लगाकर लाभ कमा सकते हैं। लेकिन, ऑप्शन ट्रेडिंग आसान नहीं है। इसके लिए सटीक जानकारी, रणनीति और सबसे जरूरी – सही ट्रेडिंग इंडिकेटर की जरूरत होती है।

इस लेख में हम जानेंगे कि ऑप्शन ट्रेडिंग में सबसे अच्छा इंडिकेटर कौन-सा है, क्यों जरूरी है, और किन-किन इंडिकेटर्स को साथ में उपयोग करके आप अपनी सफलता की संभावना बढ़ा सकते हैं।

ऑप्शन ट्रेडिंग क्या है? (संक्षेप में)

ऑप्शन ट्रेडिंग एक प्रकार की डेरिवेटिव ट्रेडिंग है जिसमें आप किसी स्टॉक या इंडेक्स की कीमत में होने वाले उतार-चढ़ाव पर दांव लगाते हैं। इसमें दो प्रकार के ऑप्शन होते हैं:

Call Option – जब आपको लगता है कि कीमत बढ़ेगी।

Put Option – जब आपको लगता है कि कीमत गिरेगी।

आपको प्रीमियम देना होता है और आपके पास यह अधिकार होता है कि आप उस ऑप्शन को खरीदें या न खरीदें।

ऑप्शन ट्रेडिंग में इंडिकेटर की जरूरत क्यों?

ऑप्शन ट्रेडिंग में समय (Time Decay), वॉलैटिलिटी और ट्रेंड बहुत बड़ा रोल निभाते हैं। सही निर्णय लेने के लिए आपको कुछ तकनीकी संकेतों (Technical Indicators) की जरूरत होती है ताकि आप समझ सकें:

प्राइस किस दिशा में जा रहा है?

वॉलैटिलिटी कितनी है?

सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल कहां हैं?

ब्रेकआउट होने वाला है या नहीं?

 

ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए सबसे अच्छा इंडिकेटर कौन है?

📌 1. इम्प्लाइड वोलैटिलिटी (Implied Volatility – IV)

IV ऑप्शन ट्रेडिंग का सबसे महत्वपूर्ण इंडिकेटर है।

IV यह दर्शाता है कि भविष्य में स्टॉक में कितनी हलचल हो सकती है।

अगर IV ज्यादा है, तो ऑप्शन का प्रीमियम महंगा होता है।

अगर IV कम है, तो ऑप्शन सस्ता होता है।

कैसे उपयोग करें:

जब IV हाई हो, तो ऑप्शन बेचने (Sell) की रणनीति अपनाएं।

जब IV लो हो, तो ऑप्शन खरीदने (Buy) की रणनीति बेहतर होती है।

 

📌 2. ओपन इंटरेस्ट (Open Interest – OI)

OI से आपको पता चलता है कि किसी स्ट्राइक प्राइस पर कितनी पोजीशन ओपन हैं।

ज्यादा OI = ज्यादा गतिविधि = ज्यादा विश्वास।

कम OI = कम गतिविधि = कमजोर इंटरेस्ट।

कैसे उपयोग करें:

जिन स्ट्राइक प्राइस पर सबसे ज्यादा OI होता है, वही प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस बनते हैं।

OI चेंज के अनुसार ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन का अनुमान लगाया जा सकता है।

 

📌 3. मूविंग एवरेज (Moving Averages)

यह इंडिकेटर ट्रेंड को समझने में मदद करता है।

सबसे लोकप्रिय हैं: 9 EMA, 20 EMA, और 50 SMA।

अगर कीमत मूविंग एवरेज से ऊपर है → बुलिश ट्रेंड।

अगर नीचे है → बियरिश ट्रेंड।

कैसे उपयोग करें

ऑप्शन खरीदते समय ट्रेंड की दिशा जरूर जानें।

9 EMA और 20 EMA का क्रॉसओवर ट्रेड के लिए अच्छा संकेत देता है।

 

📌 4. RSI (Relative Strength Index)

RSI एक मोमेंटम इंडिकेटर है जो यह बताता है कि स्टॉक ओवरबॉट है या ओवरसोल्ड।

70 से ऊपर = ओवरबॉट → गिरावट संभव।

30 से नीचे = ओवरसोल्ड → तेजी संभव।

कैसे उपयोग करें:

अगर RSI 30 के पास है और प्राइस ऊपर जाना शुरू करता है → Call Option खरीदें।

अगर RSI 70 के पास है और प्राइस गिर रहा है → Put Option खरीदें।

 

📌 5. वॉल्यूम (Volume)

वॉल्यूम यह बताता है कि किसी मूवमेंट के पीछे कितनी ताकत है।

अगर प्राइस बढ़ रहा है और वॉल्यूम भी बढ़ रहा है → ट्रेंड मजबूत है।

प्राइस बढ़े लेकिन वॉल्यूम घटे → फर्जी ब्रेकआउट हो सकता है।

कैसे उपयोग करें:

ऑप्शन में एंट्री लेते समय वॉल्यूम चेक करें।

ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन के समय वॉल्यूम सपोर्ट करे तो एंट्री लें।

 

ऑप्शन ट्रेडिंग में एक साथ उपयोग होने वाले इंडिकेटर्स

कोई एक इंडिकेटर कभी भी 100% सही सिग्नल नहीं देता। इसलिए कंप्लीमेंटरी इंडिकेटर्स का उपयोग करना जरूरी है।

उदाहरण रणनीति:

इंडिकेटर सिग्नल कार्यवाही

RSI < 30 ओवरसोल्ड Call Option की तैयारी करें
OI बढ़ रहा डिमांड बढ़ रही सपोर्ट मजबूत
IV कम है प्रीमियम सस्ता ऑप्शन खरीदें
वॉल्यूम बढ़ रहा कनफर्मेशन एंट्री लें

 

ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए कुछ पॉपुलर टूल्स

1. Sensibull – IV, OI, Strategy Builder

2. Opstra – Greeks, Payoff Graphs

3. TradingView – इंडिकेटर एनालिसिस के लिए बेस्ट चार्टिंग प्लेटफॉर्म

4. NSE Website – Real-time OI और Option Chain Data

 

टिप्स: ऑप्शन ट्रेडिंग में सफल होने के लिए

1. केवल टेक्निकल इंडिकेटर पर निर्भर न रहें, मार्केट सेंटिमेंट भी देखें।

2. बिना स्टॉप लॉस के ऑप्शन ट्रेडिंग न करें।

3. ट्रेडिंग से पहले प्लान बनाएं और वही फॉलो करें।

4. न्यूज, रिजल्ट और बड़े इवेंट के समय IV ज्यादा होता है – संभलकर ट्रेड करें।

5. पेपर ट्रेडिंग करके रणनीति को पहले टेस्ट करें।

 

निष्कर्ष

ऑप्शन ट्रेडिंग में “Implied Volatility” और “Open Interest” सबसे महत्वपूर्ण इंडिकेटर्स माने जाते हैं। इनके साथ-साथ मूविंग एवरेज, RSI और वॉल्यूम मिलकर आपको बेहतर निर्णय लेने में मदद करते हैं।

याद रखें, कोई भी इंडिकेटर गारंटी नहीं देता कि ट्रेड सफल ही होगा, लेकिन इनका सही उपयोग आपके फैसलों को मजबूत और जोखिम को नियंत्रित कर सकता है।

सुझाव↙️

यदि आप ऑप्शन ट्रेडिंग में नए हैं, तो शुरुआत छोटे निवेश और पेपर ट्रेडिंग से करें। धीरे-धीरे अनुभव के साथ आप इन इंडिकेटर्स को बेहतर समझ पाएंगे।

 

 

 
 

 

शेयर बाजार में ऑप्शन चेन क्या है? What is option chain in stock market?

sheyar baajaar mein vikalp shrrnkhala kya hai?
फ्रेंड्स जैसा कि आप जानते हैं  Investingsetup सभी इनफॉरमेशन जो बिल्कुल जेनुइन है इसलिए कोई भी लेख बड़े ध्यान पूर्वक  पढ़ें. शेयर बाजार में ऑप्शन ट्रेडिंग एक पावरफुल टूल है, जिससे निवेशक और ट्रेडर्स दोनों कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। लेकिन ऑप्शन ट्रेडिंग की दुनिया थोड़ी जटिल लग सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो शुरुआत कर रहे हैं। इसीलिए “ऑप्शन चेन” को समझना बेहद जरूरी है।

इस आर्टिकल में हम आपको सरल  भाषा में समझाएंगे कि ऑप्शन चेन क्या होती है, इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं, और कैसे आप इसे पढ़कर सही निर्णय ले सकते हैं।

📌 ऑप्शन ट्रेडिंग का संक्षिप्त परिचय:

ऑप्शन एक प्रकार का डेरिवेटिव होता है जो आपको भविष्य में किसी स्टॉक को खरीदने (Call Option) या बेचने (Put Option) का अधिकार देता है, लेकिन बाध्यता नहीं। ऑप्शन ट्रेडिंग में दो मुख्य पक्ष होते हैं:

बायर (Buyer) – जो प्रीमियम देकर विकल्प खरीदता है

सेलर (Seller) – जो वह विकल्प बेचता है और प्रीमियम कमाता है

👉ऑप्शन चेन क्या होती है?

Option Chain एक ऐसा टूल या तालिका (table) होती है जिसमें किसी स्टॉक या इंडेक्स के सभी ऑप्शन स्ट्राइक प्राइस, प्रीमियम, ओपन इंटरेस्ट, वॉल्यूम आदि की पूरी जानकारी एक ही जगह दी जाती है।

यह NSE और BSE दोनों की वेबसाइट पर उपलब्ध होता है, और लगभग हर ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में भी होता है।

ऑप्शन चेन के मुख्य कॉलम (Components of Option Chain):

ऑप्शन चेन में बहुत सारी जानकारी दी जाती है, लेकिन मुख्य रूप से नीचे दिए गए कॉलम सबसे ज्यादा काम आते हैं:

1. Strike Price (स्ट्राइक प्राइस):

यह वह मूल्य होता है जिस पर आप भविष्य में स्टॉक को खरीदने या बेचने का अधिकार रखते हैं।

2. Call Option और Put Option:

Call Option (बाईं तरफ होता है) – खरीदने का अधिकार

Put Option (दाईं तरफ होता है) – बेचने का अधिकार

3. LTP (Last Traded Price):

यह उस ऑप्शन का आखिरी ट्रेड हुआ मूल्य है।

4. Bid Price और Ask Price:

Bid Price: खरीदार कितना देने को तैयार है

Ask Price: विक्रेता कितना मांग रहा है

5. Open Interest (OI):

किसी खास स्ट्राइक प्राइस पर कितने कांट्रैक्ट अभी भी खुले हुए हैं – यानी न तो खरीदे गए, न बेचे गए। यह सपोर्ट और रेजिस्टेंस का संकेत देता है।

6. Change in OI:

पिछले दिन की तुलना में ओपन इंटरेस्ट में कितना बदलाव आया।

7. Volume:

एक दिन में कितने कांट्रैक्ट ट्रेड हुए।

8. Implied Volatility (IV):

यह बताता है कि बाजार भविष्य में कितनी price movement की उम्मीद कर रहा है। IV जितना अधिक होगा, ऑप्शन का प्रीमियम उतना ही महंगा होगा।

📊 ऑप्शन चेन को कैसे पढ़ें? (How to Read an Option Chain)

अब सवाल उठता है कि ऑप्शन चेन का सही उपयोग कैसे किया जाए। नीचे एक सरल तरीका बताया गया है:

✅ स्टेप 1: सही स्ट्राइक प्राइस चुनें

सबसे पहले उस स्टॉक या इंडेक्स का करंट मार्केट प्राइस (CMP) देखें। इसके आसपास की स्ट्राइक प्राइस पर सबसे ज्यादा ट्रेडिंग होती है।

✅ स्टेप 2: OI और Change in OI को देखें

जिस स्ट्राइक प्राइस पर सबसे ज्यादा Call OI है → वहाँ रेजिस्टेंस हो सकता है

जिस स्ट्राइक प्राइस पर सबसे ज्यादा Put OI है → वहाँ सपोर्ट हो सकता है

✅ स्टेप 3: Volume की तुलना करें

Volume यह बताता है कि मार्केट में उस स्ट्राइक प्राइस पर कितनी एक्टिविटी है। ज्यादा Volume = ज्यादा ट्रेंडिंग स्ट्राइक प्राइस।

✅ स्टेप 4: IV को भी समझें

यदि IV ज्यादा है तो मार्केट अनिश्चितता में है और प्रीमियम महंगे होंगे।

📈 उदाहरण से समझें:

मान लीजिए Nifty का करेंट प्राइस है ₹17,500।

अगर आप ऑप्शन चेन देखते हैं और 17,600 के Call Option पर सबसे ज्यादा OI है → इसका मतलब मार्केट उस स्तर को पार करना मुश्किल समझ रहा है (रेजिस्टेंस)।

वही अगर 17,400 के Put Option पर सबसे ज्यादा OI है → इसका मतलब वहाँ सपोर्ट हो सकता है।

इस तरह से आप मार्केट का मूड (Sentiment) समझ सकते हैं।

🤔 ऑप्शन चेन से क्या-क्या जान सकते हैं?

1. मार्केट का Sentiment: बुलिश है या बियरिश?

2. सपोर्ट और रेजिस्टेंस: कहां मार्केट रुक सकता है?

3. Volatility का अंदाजा: ट्रेडिंग के लिए अनुकूल समय है या नहीं?

4. Breakout या Breakdown: संभावनाओं की पहचान

ऑप्शन चेन का उपयोग कौन करता है?

उपयोगकर्ता उद्देश्य

रिटेल ट्रेडर शॉर्ट टर्म मूवमेंट पकड़ने के लिए
प्रोफेशनल ट्रेडर हेजिंग और रेंज पहचानने के लिए
निवेशक लंबी अवधि की रणनीति बनाने के लिए
ऑप्शन राइटर प्रीमियम कमाने के लिए सही स्ट्राइक ढूंढने में

⚠️सावधानी

ऑप्शन चेन का उपयोग अन्य तकनीकी संकेतकों के साथ करें, जैसे RSI, MACD, Moving Averages आदि।

केवल OI देखकर ट्रेडिंग न करें, बल्कि मार्केट ट्रेंड, खबरें और चार्ट भी देखें।

ऑप्शन ट्रेडिंग में रिस्क ज्यादा होता है, इसलिए स्टॉप लॉस ज़रूर लगाएं।

ऑप्शन चेन को समझने की ट्रिक्स:

ट्रिक फायदा

सबसे ज्यादा Put OI → Strong Support निचला स्तर पकड़ने में मदद
सबसे ज्यादा Call OI → Strong Resistance ऊपरी स्तर की सीमा पता चलती है
IV बढ़े → मार्केट में उथल-पुथल ट्रेडिंग में सावधानी
OI में तेजी से बदलाव → नया ट्रेंड बनने वाला है जल्दी एंट्री पॉइंट मिल सकता है

🛠️ ऑप्शन चेन कहां देखें?

आप नीचे दी गई जगहों पर मुफ्त में ऑप्शन चेन देख सकते हैं:

NSE India की वेबसाइट

Zerodha Kite

Upstox

Groww App

Sensibull (विशेष रूप से ऑप्शन एनालिसिस के लिए)

 निष्कर्ष (Conclusion)

ऑप्शन चेन एक बेहद जरूरी टूल है जो आपको बाजार की गहराई से जानकारी देता है। अगर आप इसे सही तरीके से पढ़ना सीख जाते हैं, तो आप न केवल बेहतर ट्रेडिंग निर्णय ले सकते हैं, बल्कि जोखिम को भी नियंत्रित कर सकते हैं।

शुरुआत में यह थोड़ा जटिल लग सकता है, लेकिन जैसे-जैसे आप इसे नियमित रूप से इस्तेमाल करेंगे, यह आपको मार्केट के प्रोफेशनल्स की तरह सोचने और काम करने में मदद करेगा।

✍️ अंत में सुझाव

रोजाना कम से कम 10 मिनट ऑप्शन चेन देखें

अपनी खुद की notes बनाएं कि किस दिन किस स्ट्राइक प्राइस पर क्या एक्टिविटी हुई

फालतू के ट्रेड्स से बचें और सटीकता पर फोकस करे

अगर आप चाहें तो मैं आपको Nifty या Bank Nifty का लाइव ऑप्शन चेन एनालिसिस भी करके समझा सकता हूँ।