google-site-verification=6xpALziFXrUirL6iqg4wCEjQhb3wObOmA8r1Kpa8SqQ mdshakirhussain817@gmail.com - Investing setup.com ⚡iLet’s Grow TogetherStock market is not difficult, when you have sufficient knowledge. Investing and trading are fast earning per month easily. If you want to earn then learn first. Here I am sharing my 6 year Investing and trading experience with you & if you have any doubt then ask me… - Page 5 of 11

passive income का सबसे अच्छा स्रोत क्या है?

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जैसा आप सभी जानते हैं | कि investing setup बिल्कुल जेनुइन इनफॉरमेशन प्रोवाइड करतl है | और स्टॉक मार्केट को बहुत से लोग डेंजरस और रिस्की मानते हैं जो है भी इसमें मैं मोमेंटम ज्यादा रहता है जो नौसिखिया है उसके लिए डेंजरस है और जिसका इस मार्केट का नॉलेज है वह अच्छा प्रॉफिट निकलते हैं.  मैं 2019 से इंवॉल्व हूं.  इस एक्सपीरियंस से स्टॉक मार्केट इन्वेस्टिंग और ट्रेडिंग और भी बहुत सरे ऑनलाइन अर्निंग से रिलेटेड आर्टिकल मिल जाएगा | जो फाइनेंशली फ्रीडम अचीव कर सकते हैं इसलिए  लेख को  ध्यान पूर्वक  से पढ़े.आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हर कोई चाहता है कि उसके पास ऐसी आय (Income) भी हो, जो बिना रोज़ाना काम किए आती रहे। यही आय कहलाती है – निष्क्रिय आय (Passive Income)। सरल शब्दों में कहें तो – जब आप एक बार मेहनत करते हैं और बाद में उसी काम से बार-बार पैसा मिलता रहता है, तो वही Passive Income है।भारत जैसे देश में, जहाँ लोग नौकरी, बिज़नेस और छोटे-मोटे कामों में व्यस्त रहते हैं, वहाँ Passive Income एक तरह से फाइनेंशियल फ्रीडम की कुंजी है। सवाल उठता है – आखिर भारत में निष्क्रिय आय का सबसे अच्छा स्रोत कौन सा है?

आइए विस्तार से समझते हp

What is the best source of passive income in India?
What is the best source of passive income in India?

1. निष्क्रिय आय क्यों ज़रूरी है?

  • आर्थिक सुरक्षा (Financial Security): अगर आपकी नौकरी या बिज़नेस में समस्या आ जाए, तो Passive Income काम आती है।
  • रिटायरमेंट प्लानिंग: बुढ़ापे में Active काम करना मुश्किल हो जाता है, तब यही आय आपका सहारा बनती है।
  • फाइनेंशियल फ्रीडम: आपको अपनी मर्ज़ी से जीने की आज़ादी मिलती है।
  • अतिरिक्त आय (Extra Income): नौकरी या बिज़नेस के साथ-साथ ये एक साइड इनकम की तरह काम करती है।

2. भारत में Passive Income के लोकप्रिय स्रोत

(A) रियल एस्टेट से रेंटल इनकम

भारत में Passive Income का सबसे पुराना और भरोसेमंद तरीका है – किराये पर प्रॉपर्टी देना

  • यदि आपके पास फ्लैट, दुकान या ऑफिस है तो उसे किराए पर देकर हर महीने तय इनकम मिलती है।
  • प्रॉपर्टी की कीमत समय के साथ बढ़ती भी है, यानी Capital Appreciation भी होता है।

फायदे:

  • लंबी अवधि तक स्थिर आय।
  • प्रॉपर्टी की वैल्यू बढ़ती रहती है।

नुकसान:

  • शुरुआती निवेश बहुत बड़ा होता है।
  • मेंटेनेंस और टैक्स का खर्च।

(B) शेयर बाज़ार में डिविडेंड इनकम

अगर आप शेयर बाज़ार में निवेश करते हैं, तो कुछ कंपनियाँ अपने मुनाफे का हिस्सा शेयरहोल्डर्स को देती हैं, जिसे Dividend कहते हैं।

  • यह एक बेहतरीन Passive Income है क्योंकि एक बार अच्छे शेयर खरीद लिए तो हर साल डिविडेंड मिलता रहेगा।

फायदे:

  • शेयर की कीमत बढ़े तो Capital Gain भी मिलेगा।
  • डिविडेंड पर टैक्स नियम अनुकूल होते हैं।

नुकसान:

  • शेयर मार्केट में रिस्क रहता है।
  • सही स्टॉक्स चुनना ज़रूरी है।

(C) म्यूचुअल फंड्स और SIP

म्यूचुअल फंड्स खासकर डिविडेंड पेइंग फंड्स या Index Funds लंबे समय तक Passive Income का अच्छा जरिया हैं।

  • SIP (Systematic Investment Plan) के ज़रिए छोटे-छोटे निवेश से बड़ा कॉर्पस बन सकता है।
  • बाद में आप Systematic Withdrawal Plan (SWP) से हर महीने आय ले सकते हैं।

(D) फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) और रिकरिंग डिपॉज़िट (RD)

भारतीय परिवारों का पसंदीदा निवेश – FD और RD

  • इसमें ब्याज के रूप में स्थिर आय मिलती है।
  • सीनियर सिटीज़न को ज्यादा ब्याज दर मिलती है।

फायदे:

  • सुरक्षित और भरोसेमंद।
  • बैंक गारंटी।

नुकसान:

  • ब्याज दरें कम होती जा रही हैं।
  • महंगाई (Inflation) को मात नहीं दे पातीं।

(E) पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और अन्य सरकारी योजनाएँ

भारत में PPF, NSC, SCSS, PMVVY जैसी योजनाएँ लंबी अवधि की Passive Income देती हैं।

  • सरकार द्वारा सुरक्षित।
  • टैक्स बचत भी।

(F) डिजिटल प्रोडक्ट्स और ऑनलाइन इनकम

आज के समय में सबसे तेजी से बढ़ता हुआ Passive Income Source है – ऑनलाइन इनकम

  • YouTube चैनल: एक बार वीडियो बनाकर अपलोड करें, एड्स से सालों-साल इनकम।
  • Blogging: आर्टिकल लिखकर Ads और Affiliate Marketing से कमाई।
  • E-book/Online Course: एक बार मेहनत करके डिजिटल प्रोडक्ट तैयार करें और बार-बार बेचें।

फायदे:

  • स्केलेबल (एक बार मेहनत, बाद में Unlimited कमाई)।
  • Low investment।

नुकसान:

  • शुरुआती मेहनत और धैर्य चाहिए।
  • Competition ज़्यादा है।

(G) रॉयल्टी इनकम

  • अगर आप लेखक, संगीतकार या आर्टिस्ट हैं तो किताब, गाना या डिजाइन से रॉयल्टी कमा सकते हैं।
  • पेटेंट और Invention से भी रॉयल्टी मिलती है।

(H) पीयर-टू-पीयर लेंडिंग (P2P Lending)

अब भारत में कई P2P Lending Platforms आ चुके हैं।

  • आप दूसरों को Loan देकर EMI के रूप में Passive Income कमा सकते हैं।
  • ब्याज दरें FD से ज़्यादा होती हैं।

नुकसान:

  • डिफॉल्ट का रिस्क।
  • सही प्लेटफ़ॉर्म चुनना ज़रूरी।

3. भारत में सबसे अच्छा Passive Income Source कौन सा है?

अब सवाल यही है कि इन सबमें Best कौन है? दरअसल, “Best” का मतलब हर व्यक्ति के लिए अलग होता है

  • अगर आप सुरक्षा चाहते हैं, तो FD, PPF और सरकारी योजनाएँ।
  • अगर आप उच्च रिटर्न चाहते हैं, तो शेयर मार्केट और म्यूचुअल फंड।
  • अगर आपके पास प्रॉपर्टी है, तो Rental Income सबसे बेहतर।
  • अगर आप क्रिएटिव या डिजिटल स्किल्स रखते हैं, तो Blogging, YouTube और Online Course।

लेकिन एक स्मार्ट निवेशक वही है, जो अपनी Income Sources को Diversify करता है। यानी केवल एक ही रास्ते पर निर्भर न रहकर अलग-अलग तरीकों से Passive Income बनाना।

4. शुरुआती लोगों के लिए Step-by-Step गाइड

  1. सबसे पहले अपनी Monthly Saving तय करें।
  2. उसमें से 30% सुरक्षित निवेश (FD, PPF)।
  3. 40% ग्रोथ निवेश (Mutual Fund, Shares)।
  4. 20% Digital Income (Blogging, YouTube, Online Course)।
  5. 10% High-Risk Income (P2P Lending, Small-Cap Stocks)।

5. भविष्य में Passive Income का ट्रेंड

भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

  • Online Platforms (YouTube, Blogging, E-Commerce) Passive Income का सबसे बड़ा Source बनेंगे।
  • साथ ही, Financial Awareness बढ़ने से लोग FD और RD की जगह Mutual Funds और Stocks को चुनेंगे।
  • रियल एस्टेट हमेशा मजबूत विकल्प रहेगा, खासकर Tier-2 और Tier-3 शहरों में।

निष्कर्ष (Conclusion)

भारत में निष्क्रिय आय का सबसे अच्छा स्रोत आपकी ज़रूरत और स्थिति पर निर्भर करता है।

  • यदि आप सुरक्षित निवेश चाहते हैं → FD, PPF, Pension Plans
  • यदि आप अधिक रिटर्न चाहते हैं → Stocks, Mutual Funds, Rental Property
  • यदि आप Digital Age में जी रहे हैं और मेहनत करने को तैयार हैं → YouTube, Blogging, Online Courses

सबसे समझदारी भरा तरीका है – Multiple Passive Income Sources बनाना। यही असली Financial Freedom की कुंजी है।

आसान भाषा में कहें तो – Passive Income वह पैसा है, जो आपके सोते-सोते भी आता है। भारत में इसका सबसे अच्छा स्रोत वही है, जो आपके Interest, Skill और Investment Capacity से Match करता है।

 

sip कैसे शुरू करें .how to start sip

amerikee ke stok mein invest kar sakata hoon.अमेरिकी स्टॉक में निवेश कर सकता हूँ?

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जैसा आप सभी भली भाती जानते हैं | कि investing setup बिल्कुल जेनुइन इनफॉरमेशन प्रोवाइड करतl है स्टॉक मार्केट सोशल मीडिया औरऑनलाइन अर्निंग से रिलेटेड आर्टिकल मिल जाएगा |आज इस लेख में Us stock इन्वेस्टिंग  करके प्रॉफिट  कर     पाएंगे  जो फाइनेंशली फ्रीडम अचीव कर सकते हैं इसलिए  लेख को  ध्यान पूर्वक  से पढ़ें . क्या भारतीय रुपये से US शेयरों में निवेश संभव है? हां, बिल्कुल संभव है! आप भारत में रहते हुए भी भारतीय रुपये (₹) का उपयोग करके अमेरिकी शेयरों में निवेश कर सकते हैं—चाहे वह सीधे या अप्रत्यक्ष (indirect) रूप से हो। लेकिन इसमें कुछ नियम, प्रक्रियाएँ, और सुविधाएँ लागू होती हैं।

1. किस सीमा (limit) तक निवेश कर सकते हैं?

भारतीय निवासी लोग विदेशी निवेश के लिए रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) की Liberalised Remittance Scheme (LRS) के अंतर्गत प्रति वर्ष $250,000 तक का निवेश कर सकते हैं। यह सीमा लगभग ₹2 करोड़ से अधिक बनती है (₹ प्रकारानुसार) ।

 

2. निवेश के दो प्रमुख मार्ग (Direct vs Indirect)

2.1. प्रत्यक्ष निवेश (Direct Investment)

(क) भारतीय प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से (Indian brokers with US tie-ups)

कुछ लोकप्रिय भारतीय प्लेटफॉर्म—जैसे INDmoney, Vested Finance, HDFC Securities Global Investing, आदि—आपको सीधे यू.एस. शेयरों में निवेश का विकल्प देते हैं। ये प्लेटफ़ॉर्म अमेरिकी बाजारों से जुड़े होते हैं और आप रुपये से निवेश शुरू कर सकते हैं।

INDmoney

₹100 से शुरू हो सकता है।

5,000+ अमेरिकी शेयर और ETF तक पहुँच। ।

ऐप के भीतर INR → USD रूपांतरण और डिजिटल KYC प्रक्रिया द्वारा खाता खोलना।

fractional निवेश (अंश-शेयर) और SIP विकल्प उपलब्ध। ।

सुरक्षित: ‘Direct access’ खाते GIFT City में IFSCA नियमन के अंतर्गत, ‘Global access’ खाते DriveWealth या Alpaca (SEC/FINRA) के साथ। निवेश SIPC द्वारा $500,000 तक सुरक्षा प्राप्त। ।

टैक्स: डिविडेंड पर US में ~25% withholding टैक्स, जिसे भारत में foreign tax credit के रूप में क्लेम किया जा सकता है। Capital gains: Short-term (<24 माह) पर आपके slab के अनुसार; Long-term (≥24 माह) पर 12.5%. ।

Vested Finance:

5,000+ US stocks और ETFs तक पहुँच। ।

HDFC Securities Global Investing:

VF Securities (₹-USD रूपांतरण और KYC सहित) के माध्यम से निवेश; प्रक्रिया में दस्तावेज़ और compliance आवश्यक। ।

 

(ख) GIFT City (India INX) के माध्यम से

India INX (GIFT City का BSE subsidiary) पर विशेष US स्टॉक्स UDRs (Unsponsored Depository Receipts) के रूप में उपलब्ध हैं—लगभग 50 stocks। fractional रूपांतरण और भारतीय मुद्रा में लेन-देन संभव, और न्यूनीकृत प्रक्रिया। ।

2.2. अप्रत्यक्ष निवेश (Indirect Investment)

सीधे अमेरिकी शेयरों में जाने के बजाय, आप भारतीय म्युचुअल फंड या ETF में निवेश कर सकते हैं, जो US इंडेक्स/शेयरों में निवेश करते हैं:

वैश्विक या specifically US एक्सपोज़र देने वाले mutual funds या ETFs।

उदाहरण: India-based funds जो S&P 500 को ट्रैक करते हैं, या global diversified funds। ।

यह तरीका सरल, कम जटिलता वाला और अक्सर अधिक समझने में आसान होता है।

 

3. कौन-कौन से प्लेटफ़ॉर्म उपलब्ध हैं?

3.1. INDmoney

भारतीय रुपये से US शेयरों में निवेश: ₹100 या $1 से शुरू (लगभग ₹85)। ।

9,000+ शेयर और 1,000+ ETFs उपलब्ध। ।

Digital KYC, rupee-to-dollar conversion, और SIP/P/A alerts जैसी सुविधाएँ। ।

सुरक्षा: Direct Access (IFSCA), Global Access (DriveWealth/Alpaca), SIPC insured। ।

Taxation: dividend withholding और capital gains टैक्स विवरण पहले ही वर्णन किया गया।

3.2. Vested Finance

5,000+ US stocks और ETFs, digital onboarding। ।

3.3. HDFC Securities Global Investing

Vested का एक अन्य रूप; विदेशी निवेश प्रक्रिया और दस्तावेज़ प्रबंधन के लिए एक और विकल्प। ।

3.4. GIFT City (India INX UDRs)

UDRs के माध्यम से सीमित संख्या में अमेरिकी स्टॉक्स में fractional निवेश। नियम-कानून से लगने वाले compliance सरल। ।

3.5. इंडायरेक्ट विकल्प

Indian mutual funds या ETFs जो US या global markets में एक्सपोज़र देते हैं। सरल और कम जोखिम लेकिन सीधे शेयर का मालिकाना हक नहीं। ।

 

4. भारत से US शेयरों में निवेश की प्रक्रिया – संक्षेप में

1. प्लेटफ़ॉर्म चुनें: INDmoney, Vested, HDFC Securities, या GIFT City UDR route।

2. खाता खोलें: Digital KYC, document verification।

3. ₹ को $ में कन्वर्ट करें: RBI LRS के तहत सीमित राशि तक। INR से USD रूपांतरण आपके बैंक या प्लेटफ़ॉर्म द्वारा।

4. निवेश करें: fractional shares, ETFs या सीधे शेयर खरीदें।

5. कर (Taxation): dividend withholding, short/long term capital gains; भारत में foreign tax credit का उपयोग।

 

5. क्या यह सुरक्षित है?

जी हाँ:

INDmoney जैसी कंपनियाँ नियामक संरक्षण (IFSCA, SEC/FINRA) और SIPC बीमा प्रदान करती हैं। ।

UDRs route में compliance और GIFT City regulatory framework से सुरक्षा मिलती है। ।

 

6. उपयोगकर्ताओं (Reddit) की राय

> “Yes, it is absolutely safe to invest in US stocks via INDmoney. Your US stocks’ ‘Direct access’ accounts are created with INDmoney Global IFSC … regulated by IFSCA in Gift City… Global access accounts… DriveWealth LLC and Alpaca Securities LLC”

यह उपयोगकर्ता अनुभव यह बताते हैं कि INDmoney यूज़र्स को सुरक्षित महसूस कराता है।

 

7. हिन्दी में सारांश (Short Summary)

भारत से US शेयरों (अमेरिकन कंपनियों) में निवेश करना पूरी तरह संभव है।

आप INR (भारतीय रुपये) के माध्यम से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से निवेश कर सकते हैं।

प्रमुख मार्ग:

1. Direct Investment: INDmoney, Vested, HDFC, GIFT-City UDRs के ज़रिए।

2. Indirect Investment: Mutual funds/ETFs जो US मार्केट में निवेश करते हैं।

 

LRS सीमा $250,000/year।

fractional निवेश, SIP, digital onboarding, और सुरक्षा विकल्प मौजूद हैं।

taxation की जानकारी: dividend withholding, CGT.

उपयोगकर्ता और तकनीकी दृष्टिकोण से यह सुरक्षित और सुविधाजनक है।

 

8. आगे क्या करना चाहिए?

1. अपनी निवेश रणनीति तय करें: सीधे शेयर या फंड।

2. एक विश्वासनीय प्लेटफ़ॉर्म चुनें—उदाहरणतः INDmoney।

3. LRS सीमा, लागत (charges), टैक्स नियम और प्रक्रिया को समझें।

4. जोखिम-प्रबंधन के लिए diversified portfolio बनाएँ।

5. नियमित रूप से अपडेटेड रहें—कर नियम, शुल्क, और exchange rates पर ध्यान दें।

सारांश टेबल

पहलू जानकारी

Legal Structure LRS के तहत $250k/year तक निवेश वैध
Platforms INDmoney, Vested, Groww, Mutual Funds/ETFs
Minimum Investment $1 या ≈₹100 (fractional)
Taxation Dividends (25% withholding, Indian credit), CG – ST/LT
Fees कम से कम — INDmoney में अक्सर zero charges
Benefits Diversification, USD appreciation, convenience, SIP

यदि आप चाहें तो मैं आपको INDmoney या Vested जैसे किसी प्लेटफ़ॉर्म पर कैसे शुरुआत करें, इस पर step-by-step मार्गदर्शन भी दे सकता हूँ—आप बताइए कि आपकी क्या प्राथमिकता है: सरल शुरुआत, कम लागत, या विशेष सुविधाएँ?

 

 
 

IPO कैसे काम करता है? How does an IPO work?

#HowdoesanIPOwork

जैसा आप सभी जानते हैं | कि investing setup बिल्कुल जेनुइन इनफॉरमेशन प्रोवाइड करतl है | और मैं 2019 से इंवॉल्व हूं इसी एक्सपीरियंस से स्टॉक मार्केट इन्वेस्टिंग और ट्रेडिंग और भी बहुत सरे ऑनलाइन अर्निंग से रिलेटेड आर्टिकल मिल जाएगा | जो फाइनेंशली फ्रीडम अचीव कर सकते हैं इसलिए  लेख को  ध्यान पूर्वक  से पढ़े. आज इस आर्टिकल में IPO कैसे काम करता है? | How Does an IPO Work?

1. IPO का मतलब क्या है?

IPO यानी Initial Public Offering, वह प्रक्रिया है जिसमें एक प्राइवेट कंपनी पहली बार आम जनता (Public Investors) को अपने शेयर बेचती है।

Private Company → सिर्फ फाउंडर, शुरुआती इन्वेस्टर्स और कुछ बड़े प्राइवेट इन्वेस्टर्स के पास शेयर होते हैं।

Public Company → अब कोई भी इन्वेस्टर शेयर खरीद सकता है (स्टॉक एक्सचेंज के जरिए)।

सीधे शब्दों में — IPO का मतलब है कंपनी का “पब्लिक” हो जाना।

 

2. कंपनी को IPO की ज़रूरत क्यों होती है?

किसी भी कंपनी के IPO लाने के पीछे कुछ बड़े कारण होते हैं:

1. पैसा जुटाना → बिज़नेस को बढ़ाने, नए प्रोजेक्ट शुरू करने, कर्ज चुकाने या टेक्नोलॉजी अपग्रेड करने के लिए।

2. ब्रांड वैल्यू बढ़ाना → पब्लिक कंपनी बनने से मार्केट में विश्वास और पहचान बढ़ती है।

3. पुराने इन्वेस्टर्स को Exit देना → जो इन्वेस्टर्स पहले कंपनी में पैसा लगा चुके हैं, वो अब पब्लिक मार्केट में शेयर बेचकर प्रॉफिट कमा सकते हैं।

4. कर्मचारियों के लिए शेयर बेनिफिट → ESOP (Employee Stock Ownership Plan) के जरिए।

 

3. IPO लाने से पहले कंपनी की तैयारी

IPO सिर्फ “शेयर बेचने” का काम नहीं है — यह एक लंबी और नियमों से भरी प्रक्रिया है।
यहाँ कंपनी को कुछ बड़े स्टेप्स लेने पड़ते हैं:

a. Merchant Banker/Underwriter चुनना

कंपनी Merchant Banker या Investment Bank हायर करती है (जैसे ICICI Securities, Kotak Mahindra Capital आदि)

इनका काम होता है IPO की पूरी प्लानिंग, वैल्यूएशन और मार्केटिंग करना।

b. Due Diligence और Paperwork

कंपनी का पूरा वित्तीय रिकॉर्ड, लीगल डॉक्यूमेंट्स, बिज़नेस मॉडल और रिस्क फैक्टर्स चेक किए जाते हैं।

इसका मकसद है यह दिखाना कि कंपनी निवेश करने लायक है।

c. DRHP बनाना (Draft Red Herring Prospectus)

DRHP एक बड़ा डॉक्यूमेंट है जिसे SEBI (Securities and Exchange Board of India) के पास जमा किया जाता है।

इसमें कंपनी का इतिहास, मैनेजमेंट, बिज़नेस प्लान, फाइनेंशियल रिपोर्ट्स और रिस्क डिटेल्स होते हैं।

 

4. IPO का Approval और Pricing Process

a. SEBI Approval

DRHP देखने के बाद SEBI सवाल पूछ सकता है और बदलाव करने को कह सकता है।

जब सब क्लियर हो जाता है, तो IPO को ग्रीन सिग्नल मिल जाता है।

b. Pricing Method

IPO दो तरीकों से प्राइस किया जा सकता है:

1. Fixed Price Issue → पहले से तय कीमत पर शेयर बेचना।

2. Book Building Issue → प्राइस रेंज तय की जाती है, इन्वेस्टर्स अपनी बोली (bid) लगाते हैं और फिर फाइनल प्राइस निकलता है।

 

5. IPO का Allotment Process (शेयर कैसे मिलते हैं)

a. IPO ओपन होना

IPO आमतौर पर 3 से 5 दिन खुला रहता है।

इस दौरान इन्वेस्टर्स (Retail, QIB, HNI) अप्लाई कर सकते हैं।

b. Investor Categories

1. Retail Individual Investor (RII) → आम लोग, जिनका इन्वेस्टमेंट ₹2 लाख तक हो सकता है।

2. Qualified Institutional Buyer (QIB) → म्यूचुअल फंड, बैंक्स, इंश्योरेंस कंपनियां।

3. High Networth Individual (HNI) → ₹2 लाख से ऊपर लगाने वाले इन्वेस्टर्स।

 

c. Oversubscription Case

अगर किसी IPO में मांग ज्यादा और शेयर कम हैं, तो शेयर लॉटरी सिस्टम से अलॉट होते हैं।

d. Allotment & Refund

IPO क्लोज होने के 1 हफ्ते में अलॉटमेंट हो जाता है।

जिन्हें शेयर नहीं मिलते, उनका पैसा वापस कर दिया जाता है।

 

6. स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग

IPO पूरा होने के बाद शेयर NSE और BSE पर लिस्ट होते हैं।

Listing Day पर मार्केट डिमांड के हिसाब से शेयर का ओपनिंग प्राइस तय होता है।

अगर डिमांड ज्यादा है → शेयर प्रीमियम पर खुलेगा (Listing Gain)

अगर डिमांड कम है → शेयर डिस्काउंट पर खुल सकता है (Loss)

 

7. IPO के फायदे और नुकसान

फायदे (For Company)

बड़ा फंड जुटाना।

पब्लिक इमेज और ट्रस्ट बढ़ना।

पुरानों इन्वेस्टर्स को Exit।

नुकसान (For Company)

पब्लिक और SEBI के नियमों का पालन करना जरूरी।

हर क्वार्टर रिजल्ट पब्लिक करना।

शेयर प्राइस गिरने पर नेगेटिव पब्लिसिटी।

फायदे (For Investor)

शुरुआती स्टेज पर अच्छे बिज़नेस में निवेश का मौका।

Listing Gains से जल्दी प्रॉफिट।

नुकसान (For Investor)

ओवरहाइप्ड IPO में घाटे का खतरा।

कंपनी का फ्यूचर अनिश्चित।

 

8. एक Example से समझें – Zomato IPO

Issue Price: ₹76

Oversubscription: करीब 38 गुना।

Listing Price: ₹115 (लगभग 50% Listing Gain)

लेकिन, कुछ महीनों बाद शेयर ₹50 तक गिर गया।

सीख: सिर्फ लिस्टिंग गेन पर भरोसा मत करें, कंपनी का लॉन्ग-टर्म बिज़नेस मॉडल भी देखें।

 

9. IPO में निवेश करने से पहले क्या देखें?

1. कंपनी का बिज़नेस मॉडल → क्या ये लंबे समय तक टिक पाएगा?

2. Profitability → क्या कंपनी प्रॉफिट में है या घाटे में?

3. Debt Level → ज्यादा कर्ज वाली कंपनी रिस्की होती है।

4. Valuation → क्या शेयर की कीमत सही है या ज्यादा महंगी है?

5. मैनेजमेंट क्वालिटी → कंपनी के लीडर्स का ट्रैक रिकॉर्ड।

 

10. IPO का Simplified Flowchart

1. कंपनी को फंड चाहिए → IPO प्लान।

2. Merchant Banker → DRHP → SEBI Approval।

3. प्राइस तय → IPO ओपन → इन्वेस्टर्स Apply।

4. Allotment → शेयर लिस्ट → ट्रेडिंग शुरू।

 

➡️निष्कर्ष

IPO एक रोमांचक मौका हो सकता है — कंपनी के लिए भी और इन्वेस्टर्स के लिए भी।
लेकिन यह जल्दी अमीर बनने की मशीन नहीं है। IPO में कूदने से पहले कंपनी की असली ताकत, फाइनेंशियल हेल्थ और बिज़नेस मॉडल को समझना जरूरी है।

याद रखिए — मार्केट में हाइप तो बहुत होती है, लेकिन हकीकत में केवल सही रिसर्च ही आपके पैसे को सुरक्षित रख सकती है।

 

 

Stock market ka hakeekat kya hai.स्टॉक मार्केट की हकीकत क्या है

#Stockmarketkahakeekatkyahai

जैसा आप सभी जानते हैं | कि investing setup बिल्कुल जेनुइन इनफॉरमेशन प्रोवाइड करतl है | बहुत सारे लोग इस स्टॉक मार्केट को सिर्फ सत्ता या जुआ समझ कर के इस पर फोकस नहीं  करते  और यह वही लोग होते हैं जो सीखना नहीं चाहते हैं और अगर सीखेंगे  तो आधा अधूरा इसी काम नॉलेज कम इनफॉरमेशन की वजह से इसमें सक्सेस नहीं होते.और मैं 2019 से इंवॉल्व हूं इसी एक्सपीरियंस से स्टॉक मार्केट इन्वेस्टिंग और ट्रेडिंग और भी बहुत सरे ऑनलाइन अर्निंग से रिलेटेड आर्टिकल मिल जाएगा | जो फाइनेंशली फ्रीडम अचीव कर सकते हैं इसलिए  लेख को  ध्यान पूर्वक  से पढ़े स्टॉक मार्केट की हकीकत – सपनों से सच्चाई तक की यात्रा .अगर आपने कभी सोशल मीडिया पर स्टॉक मार्केट से जुड़े वीडियो देखे हैं, तो आपने जरूर सुना होगा – “स्टॉक मार्केट से महीने में लाखों कमाओ”बस एक ट्रिक अपनाओ और अमीर बन जाओ” लेकिन, क्या हकीकत सच में इतनी आसान है? स्टॉक मार्केट की सच्चाई उतनी ही रोचक है जितनी कि एक फिल्म की कहानी – जिसमें कभी-कभी हीरो जीतता है और कभी खलनायक (नुकसान) हावी हो जाता है।

चलिए इस आर्टिकल में हम जानेंगे स्टॉक मार्केट की असली तस्वीर, ताकि आपको बिना किसी भ्रम के सही नजरिया मिले।

1. स्टॉक मार्केट क्या है – एक छोटा रिफ्रेशर

स्टॉक मार्केट एक ऐसी जगह है जहां कंपनियों के शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं।
यह दो मुख्य हिस्सों में बंटा होता है:

1. प्राइमरी मार्केट – जहां कंपनी पहली बार शेयर बेचती है (IPO)।

2. सेकेंडरी मार्केट – जहां लोग आपस में शेयर खरीदते-बेचते हैं (जैसे NSE, BSE)।

 

यह कोई जुआ घर नहीं है, बल्कि इकोनॉमी का दिल है, जहां पैसों का फ्लो कंपनियों और निवेशकों के बीच होता है।

2. स्टॉक मार्केट की आम गलतफहमियां

लोगों के मन में स्टॉक मार्केट को लेकर कई मिथक हैं, जिनमें से कुछ सबसे पॉपुलर ये हैं:

“यह सिर्फ अमीरों का खेल है”
सच: कोई भी व्यक्ति, चाहे उसकी आमदनी कम हो, निवेश कर सकता है।

“यह सिर्फ किस्मत का खेल है”
सच: शॉर्ट टर्म में थोड़ी किस्मत का रोल होता है, लेकिन लॉन्ग टर्म में यह ज्ञान, रिसर्च और धैर्य पर चलता है।

“एक बार सही शेयर खरीद लिया तो रातों-रात करोड़पति”
सच: ऐसे किस्से होते हैं, लेकिन वे अपवाद हैं। ज्यादातर लोगों की सफलता सालों की मेहनत का नतीजा है।

3. हकीकत #1 – यहां जल्दी अमीर बनने का शॉर्टकट नहीं है

कई लोग मार्केट में आते ही उम्मीद करते हैं कि महीने-दो महीने में वे बड़ी रकम बना लेंगे।
असल में:

शॉर्ट टर्म में – उतार-चढ़ाव (वोलैटिलिटी) ज्यादा होता है।

लॉन्ग टर्म में – सही कंपनियों में निवेश से स्थिर रिटर्न मिलता है।

👉 अगर आप ट्रेडिंग कर रहे हैं, तो सीखना, प्लान बनाना और रिस्क मैनेजमेंट जरूरी है।
👉 अगर आप निवेश कर रहे हैं, तो धैर्य और सही कंपनी का चुनाव सबसे बड़ा हथियार है।

4. हकीकत #2 – 90% लोग यहां पैसा खोते हैं

एक रिसर्च के अनुसार, लगभग 90% नए ट्रेडर्स अपना पैसा खो देते हैं। वजहें:

बिना सीखे ट्रेड करना

टिप्स और अफवाहों पर भरोसा

लालच और डर के आधार पर फैसले

स्टॉप लॉस का इस्तेमाल न करना

सीख: अगर आप रिसर्च नहीं करते, तो आप उस 90% में आ जाएंगे।

5. हकीकत #3 – मार्केट आपको धैर्य का असली मतलब सिखाएगा

अगर आपने 1-2 साल के लिए अच्छे शेयर लिए हैं, तो हो सकता है कि आपको बीच में नुकसान दिखे।

लेकिन जो लोग 5-10 साल तक अच्छे फंडामेंटल वाली कंपनियों में निवेश रखते हैं, वे ज्यादातर अच्छा मुनाफा कमाते हैं।

उदाहरण:
अगर किसी ने 2010 में HDFC Bank, TCS या Infosys खरीदी होती, तो आज उसका निवेश कई गुना हो चुका होता।

6. हकीकत #4 – मार्केट इमोशंस से नहीं, डेटा से चलता है

मार्केट में सबसे बड़ा दुश्मन आपका खुद का दिमाग हो सकता है।
लालच, डर और ओवरकॉन्फिडेंस से लोग गलतियां करते हैं।

👉 सफल लोग क्या करते हैं?

चार्ट्स और डेटा देखते हैं

कंपनी के बिजनेस मॉडल को समझते हैं

ट्रेंड्स को पहचानते हैं

भावनाओं को कंट्रोल करते हैं

7. फायदे – अगर आप सही तरीके से खेलें

पैसिव इनकम – डिविडेंड्स और ग्रोथ से।

महंगाई से बचाव – लॉन्ग टर्म में रिटर्न महंगाई से ज्यादा होते हैं।

वित्तीय स्वतंत्रता – सही निवेश आपको फाइनेंशियल फ्रीडम दिला सकता है।

कंपाउंडिंग का जादू – लंबे समय में निवेश से पैसा exponentially बढ़ता है।

8. नुकसान – अगर आप गलत तरीके से खेलें

पूंजी का नुकसान – रिस्क मैनेजमेंट न हो तो।

इमोशनल स्ट्रेस – लगातार उतार-चढ़ाव देखने से।

लालच का जाल – जल्दी अमीर बनने के चक्कर में ज्यादा रिस्क लेना।

लिक्विडिटी का रिस्क – गलत समय पर बेचना या फंस जाना।

9. सही मानसिकता – जीत की चाबी

सीखते रहें – मार्केट बदलता रहता है, इसलिए अपडेट रहना जरूरी है।

छोटा शुरू करें – शुरुआत में ज्यादा पैसा न लगाएं।

डाइवर्सिफाई करें – सारे पैसे एक ही शेयर में न डालें।

लॉन्ग टर्म सोचें – असली मुनाफा समय के साथ आता है।

इमोशंस कंट्रोल करें – डर और लालच से दूर रहें।

 

10. स्टॉक मार्केट की हकीकत – एक लाइन में

> “स्टॉक मार्केट कोई पैसे बनाने की मशीन नहीं है, बल्कि यह पैसे को बढ़ाने का एक साधन है – बशर्ते आप धैर्य, ज्ञान और अनुशासन के साथ खेलें।”

 

11. एक छोटा रोडमैप – शुरुआत कैसे करें

1. डिमैट अकाउंट खोलें – किसी भरोसेमंद ब्रोकर से।

2. बेसिक सीखें – शेयर, इंडेक्स, कैंडलस्टिक, फंडामेंटल्स।

3. प्लान बनाएं – लॉन्ग टर्म या शॉर्ट टर्म?

4. छोटे से शुरू करें – ₹5000-₹10000 से भी शुरुआत हो सकती है।

5. सीखते-सीखते बढ़ाएं – अनुभव के साथ इन्वेस्टमेंट बढ़ाएं।

 

➡️निष्कर्ष – असली हकीकत

स्टॉक मार्केट में जो लोग अनुशासन, धैर्य और ज्ञान के साथ चलते हैं, वही विजेता बनते हैं।
बाकी लोग अफवाहों, लालच और शॉर्टकट के चक्कर में पैसा खो देते हैं। यह जगह पैसे को आपके लिए काम पर लगाने की जगह है, न कि जुए की टेबल।
अगर आप इसे सही तरीके से अपनाते हैं, तो यह आपकी जिंदगी बदल सकता है।

 

स्टॉक मार्केट में IPO क्या होता है what is IPO in stock market

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जैसा आप सभी जानते हैं | कि investing setup बिल्कुल जेनुइन इनफॉरमेशन प्रोवाइड करतl है स्टॉक मार्केट सोशल मीडिया औरऑनलाइन अर्निंग से रिलेटेड आर्टिकल मिल जाएगा | जो फाइनेंशली फ्रीडम अचीव कर सकते हैं इसलिए  लेख को  ध्यान पूर्वक  से पढ़ें .IPO क्या होता है? – आसान भाषा में पूरी जानकारी दोस्तों, अगर आपने कभी टीवी, न्यूज या सोशल मीडिया पर यह खबर सुनी हो कि –
“XYZ कंपनी का IPO आने वाला है”
तो आपके दिमाग में सवाल जरूर आया होगा – ये IPO आखिर है क्या? और लोग इसमें निवेश क्यों करते हैं? चलिए, आज हम इसे बिल्कुल आसान उदाहरण के साथ समझते हैं।

1️⃣ IPO का मतलब

IPO का फुल फॉर्म है – Initial Public Offering।
हिंदी में इसे कहते हैं – प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव।

मतलब, जब कोई प्राइवेट कंपनी पहली बार अपने शेयर पब्लिक को बेचने के लिए शेयर बाजार में आती है, तो इस प्रक्रिया को IPO कहते हैं।

सीधी भाषा में:

कंपनी पहले सिर्फ मालिकों, पार्टनर्स और कुछ बड़े निवेशकों की होती है।

लेकिन जब कंपनी को आगे बढ़ने के लिए ज्यादा पैसे की जरूरत पड़ती है, तो वो अपने शेयर (हिस्सेदारी) आम लोगों को बेच देती है।

यही शेयर बेचने की प्रक्रिया IPO कहलाती है।

 

2️⃣ कंपनी को IPO क्यों लाना पड़ता है?

IPO लाने के पीछे कई कारण हो सकते हैं:

1. बिज़नेस का विस्तार करना

नई फैक्ट्री लगाना

नए शहर या देश में बिज़नेस फैलाना

 

2. कर्ज चुकाना

कई बार कंपनी के ऊपर बड़ा लोन होता है, जिसे चुकाने के लिए IPO लाया जाता है।

 

3. नए प्रोजेक्ट्स में निवेश

रिसर्च, नए प्रोडक्ट या नई टेक्नोलॉजी लाने के लिए फंड चाहिए।

 

4. ब्रांड वैल्यू बढ़ाना

शेयर बाजार में लिस्ट होने से कंपनी की पहचान और भरोसा बढ़ता है।

 

3️⃣ IPO कैसे काम करता है? – आसान उदाहरण

मान लीजिए “Shakir Electronics Pvt Ltd” एक प्राइवेट कंपनी है।

कंपनी 10 साल से अच्छे से चल रही है और अब इसे एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाना है, जिसकी लागत ₹100 करोड़ है।

कंपनी के पास ₹40 करोड़ हैं, बाकी ₹60 करोड़ चाहिए।

अब कंपनी के पास दो रास्ते हैं:

1. बैंक से लोन लेना (जिसमें ब्याज देना पड़ेगा)

2. पब्लिक से पैसे लेना (बिना ब्याज, लेकिन हिस्सेदारी देकर)

 

कंपनी दूसरा तरीका चुनती है और अपने 30% शेयर पब्लिक को बेचने का फैसला करती है।
इसके लिए वो SEBI (Securities and Exchange Board of India) के पास आवेदन करती है और IPO लाती है।

 

4️⃣ IPO की प्रक्रिया – स्टेप बाय स्टेप

1. Merchant Banker चुनना

कंपनी एक Merchant Banker या Book Running Lead Manager (BRLM) को हायर करती है, जो IPO का पूरा प्लान और कागजी काम संभालता है।

2. SEBI की मंजूरी लेना

SEBI को Draft Red Herring Prospectus (DRHP) नाम की डॉक्यूमेंट भेजी जाती है, जिसमें कंपनी का बिज़नेस, फाइनेंशियल डिटेल, रिस्क फैक्टर्स आदि होते हैं।

3. Price Band तय करना

कंपनी तय करती है कि एक शेयर की कीमत कितनी होगी, जैसे ₹100-₹110 के बीच।

4. IPO ओपन होना

IPO कुछ दिनों (आमतौर पर 3-5 दिन) के लिए पब्लिक के लिए खुला रहता है।

5. शेयर अलॉटमेंट

अगर ज्यादा लोग अप्लाई करते हैं तो लॉटरी सिस्टम से अलॉटमेंट होता है।

6. शेयर लिस्टिंग

IPO के बाद कंपनी के शेयर NSE और BSE पर लिस्ट हो जाते हैं और आप इन्हें सीधे खरीद-बेच सकते हैं।

 

5️⃣ IPO में निवेश करने के फायदे

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